
जिन देवी-देवताओं से पहले मिलेंगे
पंद्रह नाम घरों, मन्दिरों और त्योहारों में दिखने वाले अधिकांश को समेट लेते हैं।
हर देवता का एक पहचानने योग्य रूप है: गणेश का गज-मस्तक, शिव का त्रिशूल और चन्द्रकला, विष्णु का शंख और चक्र, हनुमान की गदा। ये चिह्न सजावट नहीं हैं; हर एक का अर्थ है, और धरमकिरा का हर देवता-पृष्ठ उन्हें एक-एक करके समझाता है।
नीचे की सूची उसी क्रम में है जिसमें अधिकांश लोग इनसे मिलते हैं। किसी भी नाम पर जाकर उस देवता का उद्गम, उनकी कथाएँ और परम्परा के अनुसार उनकी सीख पढ़ें।
परंपरा के अपने शब्दों में
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत । अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् ॥ परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम् । धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ॥
Yadā yadā hi dharmasya glānir bhavati bhārata, abhyutthānam adharmasya tadātmānaṁ sṛjāmy aham. Paritrāṇāya sādhūnāṁ vināśāya ca duṣkṛtām, dharma-saṁsthāpanārthāya sambhavāmi yuge yuge
जब-जब धर्म की हानि होती है, मैं आता हूँ — युग-युग में। अवतार-विचार का मूल।
- गणेशविघ्नहर्ता; हर आरम्भ से पहले सबसे पहले पूजे जाते हैं।
- शिवपर्वत के तपस्वी और गृहस्थ; संहारक और नवीकर्ता।
- विष्णुपालनकर्ता, जो अवतार लेकर लौटते हैं — राम और कृष्ण उनमें हैं।
- लक्ष्मीसमृद्धि और कृपा; भारत के अधिकांश भाग में दीवाली की रात की देवी (बंगाल उस रात काली की पूजा करता है)।
- सरस्वतीविद्या, वाणी और कला; विद्यार्थियों की आराध्या।
- दुर्गा मातासिंह पर सवार रक्षक देवी; नवरात्रि की नौ रातें उन्हीं की हैं।
- काली मातामाँ का उग्र रूप, जो उसका अन्त करती हैं जिसका अन्त होना चाहिए।
- पार्वतीशिव की सहधर्मिणी; गणेश और कार्तिकेय की माता; कोमल देवी।
- श्रीरामरामायण के आदर्श राजा; उनका नाम सबसे सरल मंत्र है।
- श्रीकृष्णगोकुल के बालक, वृन्दावन की बाँसुरी, गीता के उपदेशक।
- हनुमानभक्ति और बल एक साथ; राम के सेवक, कभी अभिमानी नहीं।
- कार्तिकेयदेवताओं के सेनापति; दक्षिण में मुरुगन, मोर पर सवार।
- सूर्यसूर्य — एकमात्र देवता जिसे सब देख सकते हैं।
- शनि देवशनि; धीमे शिक्षक, जिनसे डरा भी जाता है और सम्मान भी।
- ब्रह्मासृष्टिकर्ता, त्रिमूर्ति में प्रथम — और जिनकी पूजा दुर्लभ है।
यह कहाँ से आता है
एक-पंक्ति परिचय धरमकिरा के देवता-पृष्ठों का सार हैं, जो अपने शास्त्रीय स्रोत (शिव पुराण, देवी माहात्म्य, भागवत पुराण, वाल्मीकि रामायण आदि) स्वयं बताते हैं।














