सीधे सामग्री पर जाएँ
Dharamkira
रानी की वाव बावड़ी के आलों में उकेरी देवताओं और गणों की बलुआ-पत्थर की मूर्तियाँ

देव दर्शन — देवों को जानिए

देवगण

सनातन धर्म के महान देवी-देवता — वे कहाँ से आए, क्यों आए, परम्परा उनकी कौन-सी कथाएँ कहती है, और हर एक आज के जीवन को क्या सिखाता है।

हमारे देव-चित्र वास्तविक शास्त्रीय चित्रकृतियाँ और प्रिंट हैं — राजा रवि वर्मा और पारम्परिक शैलियों की सार्वजनिक-डोमेन कृतियाँ तथा खुले लाइसेंस वाले संग्रहालय-स्कैन — हाथ से चुने हुए, जिनका श्रेय 'परिचय' पृष्ठ पर है। यहाँ कुछ भी AI-कल्पित नहीं है।

चित्र: SnehrashmiCC BY-SA 4.0CC BY-SA 4.0
ये शब्द नए हैं?
मंत्र
पवित्र शब्द या ध्वनियाँ (प्रायः संस्कृत में), जिन्हें मन साधने और भगवान के सम्मान में दोहराया जाता है।
पूजा
घर या मंदिर में उपासना — देवता को दीप, फूल, भोग और प्रार्थना अर्पित करना।
व्रत
संकल्प का दिन — प्रायः उपवास या सादा भोजन — किसी देवता या अपनों की मंगलकामना के लिए।
जयंती
जन्मदिवस का उत्सव — किसी देवता, संत या महापुरुष का।
ध्यान
ध्यान — मन को एक शांत आधार देना, जैसे साँस, लौ या मंत्र।
श्लोक
संस्कृत पद्य — पवित्र काव्य की दो पंक्तियाँ, जैसी गीता में हैं।
संकल्प
पूजा या साधना के आरम्भ में बोला गया छोटा वचन — कि आप क्या कर रहे हैं और किसलिए।
आरती
देवता के सामने जलते दीप को गाते हुए धीरे-धीरे घुमाना — पूजा का जगमगाता समापन।
पीली धोती और रत्नजड़ित मुकुट में हरे परिदृश्य के बीच अपने मूषक पर सवार गणेश, हाथों में परशु और मोदक — 1910 का बाज़ार-चित्र।

श्री गणेश

गणेश

5 कथाएँ व शिक्षाएँ

व्याघ्रचर्म पर ध्यानमग्न बैठे शिव, सिर पर नाग-फन, पास में पार्वती और पीछे काशी के घाट — लगभग 1895 का रंगीन लिथोग्राफ।

महादेव

शिव

5 कथाएँ व शिक्षाएँ

चँदोवे के नीचे लाल साड़ी में सिंहासनासीन देवी, सेविकाएँ पंखा झल रही हैं, चरणों में वीणा-वादिका — रवि वर्मा प्रेस का "अम्बिका" शीर्षक चित्र।

पार्वती

पार्वती

4 कथाएँ व शिक्षाएँ

सिंह पर सवार, अनेक भुजाओं में शस्त्र लिए महिषासुर का वध करती देवी दुर्गा — रवि वर्मा प्रेस का चित्र।

माँ दुर्गा

दुर्गा माता

4 कथाएँ व शिक्षाएँ

खुले केश और माला धारण किए, खड्ग उठाए, लेटे हुए शिव पर खड़ी श्याम-वर्णा देवी काली — रवि वर्मा प्रेस का चित्र।

माँ काली

काली माता

4 कथाएँ व शिक्षाएँ

वन-सरोवर में गुलाबी कमल पर खड़ी चतुर्भुज देवी लक्ष्मी, हाथों में कमल, साथ में श्वेत हाथी और हंस — राजा रवि वर्मा का चित्र।

माँ लक्ष्मी

लक्ष्मी

4 कथाएँ व शिक्षाएँ

नदी किनारे शिला पर बैठी वीणा बजाती देवी सरस्वती, पास में मोर — राजा रवि वर्मा का चित्र।

माँ सरस्वती

सरस्वती

4 कथाएँ व शिक्षाएँ

जल पर शेषनाग की कुंडली पर विराजमान विष्णु, पीछे उठे नाग-फन, दोनों ओर उनकी पत्नियाँ — राजा रवि वर्मा पर आधारित क्रोमोलिथोग्राफ।

श्री विष्णु

विष्णु

4 कथाएँ व शिक्षाएँ

सिंहासन पर सीता सहित विराजमान राम, साथ में लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न, चरणों में हनुमान — राजा रवि वर्मा का लिथोग्राफ।

श्रीराम

श्रीराम

4 कथाएँ व शिक्षाएँ

स्वर्णिम धोती में बाँसुरी बजाते कृष्ण और पास खड़ी राधा, पीछे दो श्वेत गायें और महल के स्तंभ — 1897 का क्रोमोलिथोग्राफ।

श्रीकृष्ण

श्रीकृष्ण

4 कथाएँ व शिक्षाएँ

एक हाथ में संजीवनी पर्वत और दूसरे में गदा लिए आगे बढ़ते हनुमान — रवि वर्मा प्रेस का चित्र।

श्री हनुमान

हनुमान

4 कथाएँ व शिक्षाएँ

मोर पर विराजमान षण्मुख कार्तिकेय (मुरुगन), साथ में वल्ली और देवसेना, पीछे फैला मोरपंख — राजा रवि वर्मा का चित्र।

कार्तिकेय

कार्तिकेय

4 कथाएँ व शिक्षाएँ

तेजोमय प्रभामंडल में मुकुटधारी सूर्यदेव, सात अश्वों के रथ पर आकाश में — रवि वर्मा प्रेस का प्रारंभिक लिथोग्राफ।

सूर्य देव

सूर्य

4 कथाएँ व शिक्षाएँ

मुकुट और प्रभामंडल के साथ नीले वर्ण के शनि, धनुष लिए स्वर्ण रथ पर बैठे, रथ को एक कौआ खींच रहा है।

शनि देव

शनि देव

4 कथाएँ व शिक्षाएँ

लाल पृष्ठभूमि पर श्वेत हंस पर सवार चतुर्मुख ब्रह्मा, स्वर्णिम वस्त्र, हाथों में पोथी, माला और कमंडलु — लगभग 1720 का पहाड़ी चित्र।

ब्रह्मा

ब्रह्मा

3 कथाएँ व शिक्षाएँ

ये चरित नामांकित शास्त्रों और जीवित परम्परा से निष्ठापूर्वक कहे गए हैं; जहाँ क्षेत्रीय कथन भिन्न हैं, वहाँ उनका मान रखा गया है। धरमकिरा की समस्त धार्मिक सामग्री की तरह ये भी सार्वजनिक विमोचन से पूर्व अन्तिम समीक्षा की प्रतीक्षा में हैं।