
लक्ष्मी, चंद्र — और रास के कृष्ण
शरद पूर्णिमा (कोजागरी)
वर्ष का उज्ज्वलतम चाँद — चाँदनी में खीर, और लक्ष्मी की पुकार 'को जागर्ति?'
तिथि: आश्विन पूर्णिमा
सबसे सरल शब्दों में
साल की सबसे मीठी पूर्णिमा — खीर रात भर उस चाँदनी में रखी जाती है जिससे अमृत बरसता कहा जाता है, और लक्ष्मी पूछती चलती हैं 'को जागर्ति?'
कथा और उद्देश्य
शरद पूर्णिमा का चंद्र सोलह कलाओं से पूर्ण होता है, और उसकी किरणों में अमृत माना गया है। छत पर खीर चाँदनी में रखी जाती है और प्रसाद रूप में ग्रहण होती है। लक्ष्मी रात्रि में पूछती चलती हैं — 'को जागर्ति?' — कौन जाग रहा है? — और जो जागा है, उसके घर आती हैं: इसीलिए 'कोजागरी'।
यही चाँद रास-पूर्णिमा भी है: भागवत गाता है कि इस रात कृष्ण ने स्वयं को इतना विस्तारित किया कि प्रत्येक गोपी ने केवल अपने कृष्ण संग नृत्य किया — आत्मा का अपना सत्य कि प्रियतम पूर्णतः हर एक का है। बंगाल आज की रात ही अपनी मुख्य लक्ष्मी पूजा — कोजागरी लक्ष्मी पूजा — करता है।
क्या किया जाता है
चाँदनी की खीर
खुले चंद्रमा तले (महीन छलनी से ढँकी) चावल की खीर; रात्रि-अंत या प्रातः अर्पण-वितरण।
कोजागरी लक्ष्मी पूजा
रात्रि में लक्ष्मी-पूजन; द्वार पर दीप, चरण-चिह्नों की अल्पना।
जागरण
भजन, ऋतु-क्रीड़ा और स्वयं चंद्र-दर्शन संग रात्रि-जागरण।
चंद्र दर्शन और जाप
पूर्ण चंद्र के दर्शन संग चंद्र मंत्र या ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
श्रेष्ठ समय
पूजा और खीर-स्थापन चंद्रोदय के बाद; जागरण देर रात्रि तक।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
आयुर्वेद इस रात की शीतल चाँदनी को पित्त-शामक मानता है — खीर की रीति ऋतु-चिकित्सा है।
ब्रज के मंदिरों में आज रास-दर्शन होते हैं; बाँकेबिहारी श्वेत सेवा में प्रकट होते हैं।
वाल्मीकि जयंती इसी आश्विन पूर्णिमा तिथि को है — प्रायः अगली प्रातः, क्योंकि जयंती सूर्योदय की तिथि से और शरद पूर्णिमा रात्रि के चंद्र से गिनी जाती है।
इस पर्व के मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
महालक्ष्मी मंत्र
जाप आरंभ करें →ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्राय नमः
चन्द्र ग्रह मंत्र
जाप आरंभ करें →हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ॥
हरे कृष्ण महामंत्र
जाप आरंभ करें →ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि । तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥
लक्ष्मी गायत्री
जाप आरंभ करें →