देवी
महालक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
Oṁ Śrīṁ Mahālakṣmyai Namaḥ
सरल उच्चारण: Om shreem ma-haa-laksh-myai na-mah
समृद्धिशुभारंभ
इस मंत्र के विषय में
श्री की देवी लक्ष्मी का बीज-मंत्र — 'श्री' अपने पूर्ण अर्थ में: समृद्धि, सौहार्द और घर में मंगल।
अर्थ
ॐ — श्रीं — महालक्ष्मी को प्रणाम। 'श्रीं' बीज रूप में सिमटी हुई 'श्री' है, जो जाप से बोई जाती है। मंत्र धन की देवी से उपहार नहीं, उपस्थिति माँगता है — परंपरा कहती है, जहाँ लक्ष्मी का वास है, वहाँ पर्याप्तता स्वयं चली आती है।
कब जपें
शुक्रवार और दीपावली की लक्ष्मी पूजा इसके शिखर-काल हैं; नए बही-खातों, उपक्रमों और घरों के आरंभ पर भी गिना जाता है — परंपरा से गोधूलि में, दीप जलने के समय।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- श्रींśrīṁ
- लक्ष्मी और 'श्री' का बीज-मंत्र
- महालक्ष्म्यैmahālakṣmyai
- महालक्ष्मी के लिए
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: देवी-उपासना परंपरा का पारंपरिक बीज-मंत्र

