देवी
महालक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
सरल उच्चारण
Om shreem ma-haa-laksh-myai na-mah
Oṁ Śrīṁ Mahālakṣmyai Namaḥ
इस मंत्र के विषय में
श्री की देवी लक्ष्मी का बीज-मंत्र — 'श्री' अपने पूर्ण अर्थ में: समृद्धि, सौहार्द और घर में मंगल।
अर्थ
ॐ — श्रीं — महालक्ष्मी को प्रणाम। 'श्रीं' बीज रूप में सिमटी हुई 'श्री' है, जो जाप से बोई जाती है। मंत्र धन की देवी से उपहार नहीं, उपस्थिति माँगता है — परंपरा कहती है, जहाँ लक्ष्मी का वास है, वहाँ पर्याप्तता स्वयं चली आती है।
मंत्र कंठस्थ करें
पहली पंक्ति तब तक बोलें जब तक वह बिना पढ़े न आ जाए, फिर अगली पंक्ति जोड़कर दोनों बोलें, जब तक पूरा मंत्र अपने आप न आ जाए।
पूरा मंत्र
यह मंत्र एक ही पंक्ति का है। इसे पूरा सीखें, फिर अपनी पुनरावृत्ति सूची में जोड़ें ताकि यह जाँच के लिए वापस आए।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
Oṁ Śrīṁ Mahālakṣmyai Namaḥ
0अभी नहीं बोला
ग्यारह बार का लक्ष्य रखें। जैसे ही पूरा मंत्र अपने आप आने लगे, पढ़ना छोड़ दें।
प्रगति केवल इसी डिवाइस पर रहती है।
कब जपें
शुक्रवार और दीपावली की लक्ष्मी पूजा इसके शिखर-काल हैं; नए बही-खातों, उपक्रमों और घरों के आरंभ पर भी गिना जाता है — परंपरा से गोधूलि में, दीप जलने के समय।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- श्रींśrīṁ
- लक्ष्मी और 'श्री' का बीज-मंत्र
- महालक्ष्म्यैmahālakṣmyai
- महालक्ष्मी के लिए
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: देवी-उपासना परंपरा का पारंपरिक बीज-मंत्र

