
सूर्य देव
पोंगल
चार दिन की फ़सल-कृतज्ञता — सूर्य को, वर्षा को, गौधन को और एक-दूसरे को।
तिथि: तमिल सौर मास 'थाई' की प्रथम तिथि — सूर्य का मकर प्रवेश।
सबसे सरल शब्दों में
तमिलनाडु का सूर्य को धन्यवाद: नए बर्तन में नया चावल उफनता है — 'पोंगलो पोंगल!' — और अगले दिन गायों को भी मालाएँ मिलती हैं।
कथा और उद्देश्य
पोंगल तमिलनाडु का महान कृतज्ञता-पर्व है। भोगी के दिन पुराना त्याग कर जलाया जाता है; थाई पोंगल पर नई फ़सल का चावल दूध-गुड़ में, सूर्य के सम्मुख सजे मिट्टी के बर्तन में पकाया जाता है — और जैसे ही वह उफनता है, घर पुकार उठता है 'पोंगलो पोंगल!' — छलकती समृद्धि।
मट्टू पोंगल उन बैलों-गायों का सम्मान है जिन्होंने वर्ष-भर खेत जोते — सींगें रँगी जाती हैं, मालाएँ पहनाई जाती हैं। कानुम पोंगल मिलने-जुलने का दिन है — यात्राएँ, बड़ों का आशीर्वाद, और नए वर्ष के लिए परिवार की गाँठें फिर कसी जाती हैं।
क्या किया जाता है
भोगी-शुद्धि
घर की सफ़ाई, अनुपयोगी वस्तुएँ भोगी की अग्नि को, भोर में नई कोलम (रंगोली)।
पोंगल पकाना
नए बर्तन में नया चावल, दूध और गुड़ सूर्य के सम्मुख पकाया जाता है; उफान ही समृद्धि का शकुन है — फिर सूर्य को अर्पण।
मट्टू पोंगल
गौधन को स्नान, सींगों पर रंग, पहला पोंगल उन्हें — खेती के सच्चे बुज़ुर्गों का सम्मान।
सूर्य जाप
प्रातः अर्पण के साथ सूर्य के बारह नामों का जाप।
श्रेष्ठ समय
थाई की प्रथम तिथि को सूर्योदय के बाद प्रातः पोंगल पकाया जाता है।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
'थाई पिरन्दाल वऴि पिरक्कुम' — थाई का जन्म, मार्ग का जन्म: यह मास स्वयं नई आशा की कहावत है।
प्राचीन खेल जल्लीकट्टू पोंगल ऋतु में ही होता है।
एक ही बर्तन के दो पोंगल: गुड़ से मीठा 'सक्करै पोंगल' और काली मिर्च-जीरे वाला नमकीन 'वेन पोंगल'।
इस पर्व के मंत्र
टिप्पणी: पोंगल तमिल सौर पंचांग से चलता है; 2027 में मकर-संक्रमण 14 जनवरी को सूर्यास्त के बाद है, अतः पर्व 15 जनवरी को है। कुछ पंचांग 14 जनवरी लिखते हैं — अपने परिवार का पंचांगम मानें।