सूर्य
सूर्य — अंधकार दूर करने वाले, प्रेरक (सूर्य के बारह नामों में तीसरा)
ॐ सूर्याय नमः
सरल उच्चारण
Om soor-yaa-ya na-mah
Oṁ Sūryāya Namaḥ
इस मंत्र के विषय में
सूर्य — जो नाम पूरे नक्षत्र का अपना नाम है — तीसरा है: प्रेरक, उस धातु से जिसका अर्थ है गति देना। वे केवल चमकते नहीं, चलाते हैं — तनों में रस, सागरों पर पवन, दिन का पूरा तंत्र। यह सूर्य हर चलने वाले के चालक रूप में है।
अर्थ
ॐ, सूर्य को प्रणाम — प्रेरक, अंधकार के निवारक। यह नाम सूर्य को प्रकाश ही नहीं, गति भी बना देता है: जो सबको चला रहा है। साधक उस शक्ति को नमन करता है जिसने यह भोर पहले ही चला दी है — और प्रार्थना करता है कि जड़ता नहीं, वही उसे चलाए।
मंत्र कंठस्थ करें
पहली पंक्ति तब तक बोलें जब तक वह बिना पढ़े न आ जाए, फिर अगली पंक्ति जोड़कर दोनों बोलें, जब तक पूरा मंत्र अपने आप न आ जाए।
पूरा मंत्र
यह मंत्र एक ही पंक्ति का है। इसे पूरा सीखें, फिर अपनी पुनरावृत्ति सूची में जोड़ें ताकि यह जाँच के लिए वापस आए।
ॐ सूर्याय नमः
Oṁ Sūryāya Namaḥ
0अभी नहीं बोला
ग्यारह बार का लक्ष्य रखें। जैसे ही पूरा मंत्र अपने आप आने लगे, पढ़ना छोड़ दें।
प्रगति केवल इसी डिवाइस पर रहती है।
कब जपें
सूर्य नमस्कार चक्र के बारह नामों में से एक — सूर्योदय पर प्रति आसन एक नाम, या रविवार के जाप में बारहों नाम एक साथ। जब गति ही आवश्यकता हो, तब सूर्य नाम लें — अटका कार्य, धीमा स्वास्थ्य-लाभ, या वह सुबह जो शुरू ही नहीं होती।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- सूर्यायsūryāya
- अंधकार दूर करने वाले, प्रेरक
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: सूर्य नमस्कार मंत्र-क्रम (सूर्य के पारंपरिक बारह नाम)

