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Dharamkira
पूजा विधि
तेजोमय प्रभामंडल में मुकुटधारी सूर्यदेव, सात अश्वों के रथ पर आकाश में — रवि वर्मा प्रेस का प्रारंभिक लिथोग्राफ।
सूर्य नारायणरवि वर्मा प्रेस, early 1900s

सूर्य देव · 60–90 मिनट, प्रातः

थाई पोंगल — नवान्न पाक

थाई 1 (15 जनवरी 2027)

सबसे सरल शब्दों में

नए बर्तन में नया चावल उफनने तक — 'पोंगलो पोंगल!' — गुड़ से मीठा कर खुले में सूर्य को अर्पित।

यहाँ विधि ही व्यंजन है: नया चावल, ताज़ा दूध, गुड़ — नए बर्तन में, सूर्य के सम्मुख — और उफान ही प्रार्थना है। उफनते ही 'पोंगलो पोंगल!' की पुकार, क्योंकि वर्ष वैसे ही आरंभ हो जैसे दूध चढ़ता है: उदारता से, कगार के पार।

यह पूजा करें

5 चरण, एक-एक करके — दीये, मंत्रों और घंटी के साथ, इसी स्क्रीन पर।

सामग्री

0/4 एकत्र

विधि, चरण-दर-चरण

0/5 पूर्ण
  1. प्रथम प्रकाश में कोलम

    धुली देहरी पर दिन का भव्य कोलम; पाक-स्थल — आँगन/छज्जा, सूर्य की दृष्टि में — का अपना कोलम।

  2. सूर्य-सम्मुख पात्र

    गले में हल्दी बँधा नया पात्र पूर्वाभिमुख चूल्हे पर; परिवार की उपस्थिति में दूध।

    ॐ सूर्याय नमः

    Oṁ Sūryāya Namaḥ

    ॐ, सूर्य को प्रणाम — प्रेरक, अंधकार के निवारक। यह नाम सूर्य को प्रकाश ही नहीं, गति भी बना देता है: जो सबको चला रहा है। साधक उस शक्ति को नमन करता है जिसने यह भोर पहले ही चला दी है — और प्रार्थना करता है कि जड़ता नहीं, वही उसे चलाए।

    स्रोत: सूर्य नमस्कार मंत्र-क्रम (सूर्य के पारंपरिक बारह नाम)

  3. उफान

    दूध चढ़कर छलकते ही सबकी पुकार 'पोंगलो पोंगल!' — शकुन स्वीकार; अब चावल-गुड़ भीतर।

  4. सूर्य-अर्पण

    पहला भाग केला-पत्र पर सूर्य-सम्मुख, गन्ना-फल-ताम्बूल सहित; उनके सम्मुख द्वादश-नाम या गायत्री।

    ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्

    Oṁ bhūr bhuvaḥ svaḥ tat savitur vareṇyaṁ bhargo devasya dhīmahi dhiyo yo naḥ pracodayāt

    हम सविता देव के सर्वश्रेष्ठ तेज का ध्यान करते हैं — वह प्रकाश हमारी धी (बुद्धि) को जगाए। प्रार्थना तीन लोक (भूः, भुवः, स्वः) साथ रखती है, और उनमें माँगती है केवल एक वस्तु: धी — विवेक की शक्ति। बाहरी कुछ भी नहीं माँगा गया। यह परंपरा का सबसे साहसी दाँव है, हर सूर्योदय पर नया — मनुष्य को एक प्रदीप्त बुद्धि दे दो, शेष सब उसी से आ जाता है।

    स्रोत: ऋग्वेद ३.६२.१० (यजुर्वेद की व्याहृतियों सहित)

  5. धूप में भोजन

    परिवार वहीं भोजन करे जहाँ सूर्य देख सकें — पहले मीठा, फिर वेनपोंगल; सर्वप्रथम बड़े।

टिप्पणी: पूर्व-दिवस भोगी की अग्नि, अगले दिन मट्टू पोंगल का गौ-सम्मान — पर्व-प्रविष्टि चारों दिन बताती है। फ्लैट-गृह धूप वाली खिड़की पर पकाएँ; सूर्य ने कभी बुरा नहीं माना।

पोंगलमकर संक्रांति