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सूर्य

आदित्य — अदिति के पुत्र (सूर्य के बारह नामों में नौवाँ)

ॐ आदित्याय नमः

सरल उच्चारण

Om aa-dit-yaa-ya na-mah

Oṁ Ādityāya Namaḥ

शुभारंभबल और साहसआरोग्य

इस मंत्र के विषय में

आदित्य — 'अदिति के पुत्र' — नौवाँ नाम सूर्य की माता तक पहुँचता है। अदिति स्वयं असीमता हैं — बाड़ रहित अनंत; उनके पुत्र आदित्यगण चलता हुआ विश्व-विधान हैं। सूर्य को आदित्य कहना यह स्मरण है कि यह विराटता भी किसी और विराट से जन्मी है।

अर्थ

ॐ, आदित्य को प्रणाम — असीम अदिति के पुत्र। मंत्र प्रज्वलित सूर्य को उसके वंश में लौटा देता है: अनंत से जन्मे, आकाश में अनंत का विधान वहन करते। साधक प्रकाश को — और उसके माध्यम से हर सीमित वस्तु के पीछे की असीमता को — प्रणाम करता है।

मंत्र कंठस्थ करें

पहली पंक्ति तब तक बोलें जब तक वह बिना पढ़े न आ जाए, फिर अगली पंक्ति जोड़कर दोनों बोलें, जब तक पूरा मंत्र अपने आप न आ जाए।

पूरा मंत्र

यह मंत्र एक ही पंक्ति का है। इसे पूरा सीखें, फिर अपनी पुनरावृत्ति सूची में जोड़ें ताकि यह जाँच के लिए वापस आए।

ॐ आदित्याय नमः

Oṁ Ādityāya Namaḥ

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ग्यारह बार का लक्ष्य रखें। जैसे ही पूरा मंत्र अपने आप आने लगे, पढ़ना छोड़ दें।

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कब जपें

सूर्य नमस्कार चक्र के बारह नामों में से एक — सूर्योदय पर प्रति आसन एक नाम, या रविवार के जाप में बारहों नाम एक साथ। जब दृष्टि को विस्तार चाहिए, तब आदित्य पुकारे जाते हैं — शोक में, बोझ तले, और उन निर्णयों में जिन्हें बड़ा आकाश चाहिए।

शब्द-दर-शब्द

ॐoṁ
प्रणव, आदि नाद
आदित्यायādityāya
अदिति के पुत्र
नमःnamaḥ
प्रणाम, नमन

स्रोत: सूर्य नमस्कार मंत्र-क्रम (सूर्य के पारंपरिक बारह नाम)

ॐ आदित्याय नमः

Oṁ Ādityāya Namaḥ

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