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Dharamkira
त्योहार पंचांग
सिंह पर सवार, अनेक भुजाओं में शस्त्र लिए महिषासुर का वध करती देवी दुर्गा — रवि वर्मा प्रेस का चित्र।
दुर्गा महिषासुरमर्दिनीरवि वर्मा प्रेस, c. 1910

महागौरी और कन्याएँ

दुर्गा अष्टमी

नवरात्रि का शिखर — पूर्ण शक्ति में माँ, और जीवित रूप में पूजित।

सोमवार, 19 अक्टूबर 20262027 (नवमी: पंचांगानुसार 8/9 अक्तूबर): गुरुवार, 7 अक्टूबर 2027

तिथि: आश्विन शुक्ल अष्टमी — नवरात्रि का आठवाँ दिन

सबसे सरल शब्दों में

नवरात्रि की आठवीं, सबसे प्रबल रात — दुर्गा के घोर युद्ध का दिन, जब नन्ही कन्याएँ स्वयं देवी रूप में पूजी जाती हैं।

कथा और उद्देश्य

महाष्टमी देवीपक्ष का शिखर है: महागौरी का दिन, देवी के आयुधों की अस्त्र-पूजा का दिन, और — अष्टमी-नवमी को जोड़ते 'संधि' क्षण में — चंड-मुंड का वध करने वाली चामुंडा का दिन। संधि-पूजा के अड़तालीस मिनटों के लिए बंगाल 108 दीप जलाता है।

इसका सबसे आत्मीय विधान है कन्या पूजन: नौ कन्याएँ नौ दुर्गा रूप में आमंत्रित — चरण धोए जाते हैं, तिलक, और घर के अपने हाथों परोसा पूरी-हलवा-चना। तत्त्व स्पष्ट है: देवी के प्रति श्रद्धा की परीक्षा कन्याओं के प्रति श्रद्धा से होती है।

क्या किया जाता है

महागौरी पूजा

श्वेत वर्ण में अष्टम रूप की पूजा; सप्तशती के अध्याय।

कन्या पूजन

नौ कन्याएँ (और एक बटुक) पूजित-भोजित; विदा में दक्षिणा-उपहार।

संधि पूजा

अष्टमी-नवमी संधि पर — 108 दीप; देवी की उग्रतम, क्षणतम बेला।

अस्त्र पूजा

उपकरण-आयुध पूजित — दक्षिण में यही नवमी की पूर्ण आयुध पूजा बनती है।

श्रेष्ठ समय

कन्या पूजन प्रातः; संधि पूजा तिथि-संधि के सटीक क्षण पर (स्थानीय पंचांग देखें)।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • 2026 में अष्टमी तिथि 19 अक्तूबर को लगभग प्रातः 10:50 (दिल्ली) पर समाप्त होती है और नवमी 20 अक्तूबर दोपहर लगभग 12:50 तक रहती है — अनेक घर कन्या पूजन दोनों में से किसी भी प्रातः करते हैं।

  • बेलूड़ मठ की कुमारी पूजा — 1901 में स्वामी विवेकानंद द्वारा आरंभ — आज ही जीवित कन्या की पूजा करती है।

  • उत्तर में सात्त्विक भोग; बंगाल के पंडालों में देवी को खिचुड़ी-बेगुनी।

इस पर्व के मंत्र