देवी
दुर्गा गायत्री
ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्याकुमारि धीमहि । तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात् ॥
Oṁ kātyāyanāya vidmahe kanyākumāri dhīmahi, tanno durgiḥ pracodayāt
सरल उच्चारण: Om kaat-yaa-ya-naa-ya vid-ma-he, kan-yaa-ku-maa-ri dhee-ma-hi, tan-no dur-gih pra-cho-da-yaat
इस मंत्र के विषय में
देवी की वैदिक गायत्री, तैत्तिरीय आरण्यक से — इसमें वे कात्यायनी और कन्याकुमारी नाम से पुकारी जाती हैं, और दुर्गा रूप में बुद्धि को साहस की ओर प्रेरित करने की प्रार्थना है।
अर्थ
हम कात्यायनी को जानें; कन्याकुमारी का ध्यान करें; दुर्गा हमें प्रेरित करें। दो नाम उनका विरोधाभास थामे हैं: कात्यायनी — ऋषि कात्यायन की तपस्या से प्रकट योद्धा देवी, और कन्याकुमारी — नित्य कुमारी, जिस नाम को भारत के दक्षिण छोर का मंदिर भी धारण करता है। प्रचंडता और पवित्रता एक ही छन्द में; और दुर्गा से माँगी गई है गति: झिझकते मन को उसके भय के पार धकेल दो।
कब जपें
सर्वोपरि नवरात्रि-साधना, तथा मंगलवार या शुक्रवार का नियमित अभ्यास; जिससे लंबे समय से बचा जा रहा था — वह वार्ता, वह जाँच, वह निर्णय — उसका सामना करने से पहले गिना जाता है।
शब्द-दर-शब्द
- कात्यायनाय विद्महेkātyāyanāya vidmahe
- हम कात्यायनी को जानते हैं
- कन्याकुमारि धीमहिkanyākumāri dhīmahi
- कन्याकुमारी का ध्यान करते हैं
- तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात्tanno durgiḥ pracodayāt
- दुर्गा हमें प्रेरित करें
स्रोत: तैत्तिरीय आरण्यक १० (महानारायण उपनिषद)

