
लक्ष्मी · गणेश · राम-आगमन
दीपावली · लक्ष्मी पूजन
दीपों की रात्रि — अंधकार के विरुद्ध जगमगाते घर में लक्ष्मी-पूजन।
तिथि: कार्तिक अमावस्या (उत्तर) · आश्विन अमावस्या (पश्चिम-दक्षिण) — रात वही है
आप कौन-सा पंचांग मानते हैं?
शुक्ल पक्ष का नाम हर जगह एक ही है। कृष्ण पक्ष उत्तर में एक मास का होता है और महाराष्ट्र, गुजरात व दक्षिण में उससे पिछले मास का — रात वही, नाम दो, और दोनों सही। चुनाव केवल इसी उपकरण पर रहता है।
सबसे सरल शब्दों में
रोशनी का त्योहार! दीयों की कतारें, रंगोली, मिठाइयाँ और पटाखे — क्योंकि प्रकाश हमेशा घर लौट आता है, जैसे श्रीराम लौटे थे।
कथा और उद्देश्य
कार्तिक की सबसे अंधेरी रात अयोध्या ने राम के आगमन पर दीप-पंक्तियाँ जलाईं — यही दीपावली है। उसी अमावस्या को स्वच्छ, प्रकाशित घरों में गणेश-सहित लक्ष्मी का स्वागत होता है और बही-खाते नया वर्ष आरंभ करते हैं।
यह पाँच दिनों की धुरी है — धनतेरस से भाई दूज तक — अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान का महापर्व।
इसके पाँच दिनों का अपना-अपना काम है: धनतेरस पात्र लाता है, नरक चतुर्दशी वर्ष की कालिख धोती है, अमावस की रात लक्ष्मी विराजती हैं, गोवर्धन धरती का धन्यवाद है, भाई दूज भाई-बहन की गाँठ बाँधती है।
क्या किया जाता है
लक्ष्मी-गणेश पूजन
प्रदोष-संध्या की मुख्य पूजा — विस्तृत विधि गाइड में।
दीपदान
हर द्वार, खिड़की और कोने पर दीप-पंक्तियाँ।
चोपड़ा पूजन
बही-खातों और उपकरणों का नववर्ष-पूजन।
श्रेष्ठ समय
लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में, स्थिर लग्न (प्रायः वृषभ) श्रेष्ठ; नगर-अनुसार मुहूर्त भिन्न।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
जैन परंपरा इसी रात्रि महावीर-निर्वाण मनाती है; सिख परंपरा बंदी छोड़ दिवस।
बंगाल, ओडिशा और असम में यही अमावस्या काली पूजा है — मध्यरात्रि में माँ काली की पूजा, दीप उन्हीं के लिए।
अयोध्या का दीपोत्सव एक ही संध्या में सरयू-तट पर लाखों दीये जलाता है — दीपों की गिनीज़-कीर्तिमान नदी।
इस पर्व के मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
महालक्ष्मी मंत्र
जाप आरंभ करें →ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि । तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात् ॥
लक्ष्मी गायत्री
जाप आरंभ करें →नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते । शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तु ते ॥
महालक्ष्म्यष्टकम् — प्रथम श्लोक
जाप आरंभ करें →ॐ गं गणपतये नमः
गणेश मंत्र
जाप आरंभ करें →