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Dharamkira
त्योहार पंचांग
वन-सरोवर में गुलाबी कमल पर खड़ी चतुर्भुज देवी लक्ष्मी, हाथों में कमल, साथ में श्वेत हाथी और हंस — राजा रवि वर्मा का चित्र।
लक्ष्मीराजा रवि वर्मा, c. 1896 (Ravi Varma Press print)

लक्ष्मी · गणेश · राम-आगमन

दीपावली · लक्ष्मी पूजन

दीपों की रात्रि — अंधकार के विरुद्ध जगमगाते घर में लक्ष्मी-पूजन।

रविवार, 8 नवंबर 2026शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027

तिथि: कार्तिक अमावस्या (उत्तर) · आश्विन अमावस्या (पश्चिम-दक्षिण)रात वही है

आप कौन-सा पंचांग मानते हैं?

शुक्ल पक्ष का नाम हर जगह एक ही है। कृष्ण पक्ष उत्तर में एक मास का होता है और महाराष्ट्र, गुजरात व दक्षिण में उससे पिछले मास का — रात वही, नाम दो, और दोनों सही। चुनाव केवल इसी उपकरण पर रहता है।

सबसे सरल शब्दों में

रोशनी का त्योहार! दीयों की कतारें, रंगोली, मिठाइयाँ और पटाखे — क्योंकि प्रकाश हमेशा घर लौट आता है, जैसे श्रीराम लौटे थे।

कथा और उद्देश्य

कार्तिक की सबसे अंधेरी रात अयोध्या ने राम के आगमन पर दीप-पंक्तियाँ जलाईं — यही दीपावली है। उसी अमावस्या को स्वच्छ, प्रकाशित घरों में गणेश-सहित लक्ष्मी का स्वागत होता है और बही-खाते नया वर्ष आरंभ करते हैं।

यह पाँच दिनों की धुरी है — धनतेरस से भाई दूज तक — अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान का महापर्व।

इसके पाँच दिनों का अपना-अपना काम है: धनतेरस पात्र लाता है, नरक चतुर्दशी वर्ष की कालिख धोती है, अमावस की रात लक्ष्मी विराजती हैं, गोवर्धन धरती का धन्यवाद है, भाई दूज भाई-बहन की गाँठ बाँधती है।

क्या किया जाता है

लक्ष्मी-गणेश पूजन

प्रदोष-संध्या की मुख्य पूजा — विस्तृत विधि गाइड में।

दीपदान

हर द्वार, खिड़की और कोने पर दीप-पंक्तियाँ।

चोपड़ा पूजन

बही-खातों और उपकरणों का नववर्ष-पूजन।

श्रेष्ठ समय

लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में, स्थिर लग्न (प्रायः वृषभ) श्रेष्ठ; नगर-अनुसार मुहूर्त भिन्न।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • जैन परंपरा इसी रात्रि महावीर-निर्वाण मनाती है; सिख परंपरा बंदी छोड़ दिवस।

  • बंगाल, ओडिशा और असम में यही अमावस्या काली पूजा है — मध्यरात्रि में माँ काली की पूजा, दीप उन्हीं के लिए।

  • अयोध्या का दीपोत्सव एक ही संध्या में सरयू-तट पर लाखों दीये जलाता है — दीपों की गिनीज़-कीर्तिमान नदी।

इस पर्व के मंत्र