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गणेश

गणेश मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः

सरल उच्चारण

Om gam ga-na-pa-ta-ye na-mah

Oṁ Gaṁ Gaṇapataye Namaḥ

शुभारंभरक्षा

इस मंत्र के विषय में

शुभारंभ का मंत्र। हर कार्य के आरंभ में विघ्नहर्ता गणेश जी का स्मरण सबसे पहले होता है; 'गं' उनका बीज-मंत्र है।

अर्थ

ॐ — गं — गणों के स्वामी गणपति को प्रणाम। गण शिव के अनुचर-समूह हैं; भक्त-टीकाकार इस शब्द को संसार की हर व्यवस्थित शक्ति तक फैलाते हैं — और गणपति वह मेधा हैं जो उन्हें व्यवस्थित करती है। यह मंत्र लघु रूप में एक प्रार्थना है: जो मार्ग रोकता है वह हट जाए, और जो बिखरा है वह क्रम में आ जाए।

मंत्र कंठस्थ करें

पहली पंक्ति तब तक बोलें जब तक वह बिना पढ़े न आ जाए, फिर अगली पंक्ति जोड़कर दोनों बोलें, जब तक पूरा मंत्र अपने आप न आ जाए।

पूरा मंत्र

यह मंत्र एक ही पंक्ति का है। इसे पूरा सीखें, फिर अपनी पुनरावृत्ति सूची में जोड़ें ताकि यह जाँच के लिए वापस आए।

ॐ गं गणपतये नमः

Oṁ Gaṁ Gaṇapataye Namaḥ

0अभी नहीं बोला

ग्यारह बार का लक्ष्य रखें। जैसे ही पूरा मंत्र अपने आप आने लगे, पढ़ना छोड़ दें।

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कब जपें

हर शुभारंभ का सहज मंगलाचरण — नया कार्य, पहला दिन, गृह-प्रवेश, अध्ययन या यात्रा से पहले; बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिनों में विशेष रूप से जपा जाता है। कई साधक किसी भी महत्वपूर्ण कार्य से पहले ३, ११ या १०८ आवृत्तियाँ रखते हैं।

शब्द-दर-शब्द

ॐoṁ
प्रणव, आदि नाद
गंgaṁ
गणेश जी का बीज-मंत्र
गणपतयेgaṇapataye
गणों के स्वामी गणपति के लिए
नमःnamaḥ
प्रणाम, नमन

स्रोत: गणपति अथर्वशीर्ष (गणपति उपनिषद)

ॐ गं गणपतये नमः

Oṁ Gaṁ Gaṇapataye Namaḥ

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