ताड़ासन
ताड़ासन — पर्वत मुद्रा
ताड़ = ताड़ का वृक्ष / पर्वत — पर्वत-सा सीधा खड़ा होना
खड़े आसनों की जननी: बस खड़े होना — पर सम्पूर्णता से।
सबसे सरल शब्दों में
इतने सीधे खड़े हो जाओ जैसे एक पहाड़, जिसे कोई धक्का नहीं दे सकता। अब बाँहें ऊपर तानो, पंजों पर उठो, और और भी ऊँचे बढ़ जाओ!
यह क्या है
ताड़ासन देखने में कुछ नहीं लगता — बस खड़ा हुआ व्यक्ति — और यही इसका रहस्य है: यह वह सिखाता है जिस पर हर खड़ा आसन टिका है। दोनों पैरों पर समान भार, घुटने सहज, रीढ़ ऊपर बढ़ती हुई, और शिखर प्रकाश की ओर बढ़ते वृक्ष-सा। बाँहें सिर के ऊपर तानकर और एड़ियाँ उठाकर करें तो यह धरती से उँगलियों तक पूरे शरीर का खिंचाव बन जाता है।
अभ्यास से पहले — स्वास्थ्य सर्वोपरि
अत्यंत सुरक्षित। निम्न रक्तचाप या चक्कर की स्थिति में पंजों वाला संतुलन छोड़ें और दीवार के पास एड़ियाँ टिकाकर करें।
आसन में कैसे आएँ
पैर मिलाकर या कूल्हों जितने खुले खड़े हों, भार एड़ी और पंजों पर समान।
घुटनों को हल्का सक्रिय करें, टेलबोन नीचे लम्बी करें, पेट सहज रहे।
कंधों को पीछे-नीचे घुमाएँ; बाँहें लटकी रहें, हथेलियाँ आगे।
सिर के शिखर से ऊपर की ओर बढ़ें; धीमी साँस लें।
पूर्ण खिंचाव के लिए: उँगलियाँ गूँथकर हथेलियाँ आकाश की ओर तानें, साँस लेते हुए पंजों पर उठें, ठहरें, और साँस छोड़ते हुए उतरें।
श्वास
धीमी, सम साँस; साँस लेते हुए उठें, छोड़ते हुए टिकें।
किसलिए किया जाता है
मुद्रा, संतुलन और देह-बोध — और सूर्य नमस्कार का सही आरम्भ।