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Dharamkira

सम्पूर्ण योग

बल और दमख़म

योद्धा, कुर्सी, तख़्त, टिड्डी, नाव — पाँच ईमानदार बल-निर्माता, बिना उपकरण, अंत विश्राम में।

बल8 मुद्राएँ · लगभग 14 मिनटमध्यम

सबसे सरल शब्दों में

पाँच ताक़त वाली चालें: योद्धा-से खड़े हो, अदृश्य कुर्सी पर बैठो, सीधा तख़्त थामो, टिड्डे-से उड़ो, नाव-से तैरो — फिर सिमटकर आराम। पेशियाँ गरम और गर्वीली लगेंगी।

साथ-साथ अभ्यास करें

तीरों से अपनी गति पर मुद्राएँ बदलें, या चलाएँ दबाकर हर मुद्रा को स्वयं समय लेने दें। कीबोर्ड के तीर भी चलते हैं।

ताड़ासन — उपस्थित हों

सहज साँस

सीधे खड़े हों, तीन धीमी साँसें, कंधे पीछे घूमते हुए।

यह आसन सीखें

मुद्रा 1 / 8

यह क्या है

उन दिनों के लिए संकलित जब योग से परिश्रम चाहिए: पहले खड़ा बल (वीरभद्र २ और कुर्सी), फिर तख़्त की सीधी-रेखा साधना, फिर पृष्ठ-शरीर (टिड्डी) और अग्र (नाव), समापन बालासन से — ताकि श्रम तनाव नहीं, बल बनकर बैठे। सब कुछ देह-भार और साँस से; काँपती पेशियाँ काम होने का चिह्न हैं, और पहले रुक जाना सदा मान्य है।

स्रोत: इस पृष्ठ के शास्त्रीय आसनों से धरमकिरा द्वारा संकलित — यह क्रम है, शास्त्र नहीं।

आवृत्तियाँ और लय

पूरे विश्रामों के साथ एक बार; बलवान दिनों में दो बार। जलन के लिए साँस की बलि कभी नहीं।

किसलिए किया जाता है

वह टाँग-कोर-पीठ बल गढ़ना जो हर अन्य साधना को चुपचाप चाहिए; बिना व्यायामशाला का सच्चा व्यायाम।

अभ्यास से पहले — स्वास्थ्य सर्वोपरि

हर आसन की अपनी सावधानियाँ मानें (जुड़ी हुई हैं); हृदय/रक्तचाप की स्थिति में ठहराव छोटे और साँस सदा खुली; गर्भावस्था में नाव-टिड्डी छोड़ें। काँपना ठीक है, दर्द नहीं।

हर मुद्रा, क्रम से

  1. ताड़ासन — उपस्थित हों

    सहज साँस

    सीधे खड़े हों, तीन धीमी साँसें, कंधे पीछे घूमते हुए।

  2. वीरभद्रासन २ — दाईं ओर

    सहज साँस

    चौड़ा कदम, दायाँ घुटना टखने पर, बाँहें एक रेखा। शांत अग्नि की पाँच साँसें।

  3. वीरभद्रासन २ — बाईं ओर

    सहज साँस

    दिशा बदलें; वही स्थिरता, वही लम्बा क्षितिज।

  4. उत्कटासन

    सहज साँस

    अदृश्य कुर्सी पर बैठें, बाँहें कानों की सीध में, एड़ियाँ भारी। चार साँसें।

  5. दण्डासन (तख़्त)

    सहज साँस

    एक सीधी रेखा, कलाइयाँ कंधों तले — साँस चलती रहे, थमे नहीं।

  6. शलभासन

    सहज साँस

    मुख के बल, दोनों टाँगें छोटी सच्ची ऊँचाई तक। पाँच-पाँच साँसों की दो आवृत्तियाँ।

  7. नौकासन

    सहज साँस

    नितम्ब-अस्थियों पर संतुलन, पिंडलियाँ या टाँगें उठीं, रीढ़ लम्बी। काँपना = काम होना।

  8. बालासन — आत्मसात

    सहज साँस

    झुक जाएँ और नए बल को सहजता बनकर बैठने दें।