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Dharamkira

सम्पूर्ण योग

मार्जार्यासन–बिटिलासन

मार्जारी-बिटिलासन (बिल्ली-गाय प्रवाह)

मार्जारी = बिल्ली; 'बिटिल' गाय वाले भाग का आधुनिक योग-नाम है (कोई स्पष्ट संस्कृत मूल नहीं) — बिल्ली-गाय का मेहराब

चौपाए की स्थिति में रीढ़ लहराना सीखती है — बिल्ली-सी गोल, गाय-सी झुकी।

कोमलअवधि: 6–10 धीमी आवृत्तियाँ, प्रातः या अभ्यास से पहले।

सबसे सरल शब्दों में

हाथों-घुटनों पर मेज़ की तरह आ जाओ। साँस छोड़ो और पीठ को गुस्सैल बिल्ली की तरह ऊपर गोल करो! साँस लो और पेट को नीचे झुकाकर खुश गाय की तरह ऊपर देखो। बिल्ली… गाय… बिल्ली… गाय।

यह क्या है

हथेलियों और घुटनों पर टिककर रीढ़ उन्हीं दो दिशाओं में लहराती है जो उसे आती हैं: साँस छोड़ते हुए वह चौंकी बिल्ली-सी छत की ओर गोल होती है, और साँस लेते हुए पेट झुकता है, छाती उठती है, पूँछ ऊपर — यही गाय। धीरे-धीरे दोहराने पर — साँस आगे, पीठ पीछे — यह पूरी रीढ़ की चलती-फिरती मालिश बन जाता है और किसी भी योग-सत्र का सबसे मैत्रीपूर्ण आरम्भ, मेज़ पर अकड़े कंधों समेत।

अभ्यास से पहले — स्वास्थ्य सर्वोपरि

कलाई में दर्द: मुट्ठियों या अग्र-बाहुओं पर करें। गर्दन की समस्या: सिर उठाने के बजाय सीध में रखें। गर्भावस्था में बिल्ली कोमल रखें और गहरा पेट-झुकाव छोड़ दें।

आसन में कैसे आएँ

  1. चौपाए की स्थिति लें: कलाइयाँ कंधों के नीचे, घुटने कूल्हों के नीचे, पीठ मेज़-सी सपाट।

  2. साँस छोड़ते हुए धरती को दूर धकेलें, रीढ़ ऊपर गोल करें, सिर झुकने दें — मार्जारी।

  3. साँस लेते हुए पेट झुकाएँ, छाती और टेलबोन उठाएँ, दृष्टि कोमलता से आगे — बिटिल।

  4. प्रवाह बनाए रखें — हर मेहराब पर एक पूरी साँस, गति टेलबोन से शुरू होती हुई।

  5. 6–10 आवृत्तियों के बाद बालासन में विश्राम करें।

श्वास

साँस ही इंजन है: छोड़ना = बिल्ली, लेना = गाय, कभी जल्दी नहीं।

किसलिए किया जाता है

अकड़ी रीढ़ को जगाना, मेज़ से थकी पीठ-कंधों को ढील, और साँस-गति का मेल।

इन क्रमों का अंग