संध्या विश्राम
पाँच शांत आकृतियाँ जो दिन को समेट दें — अंत धरती पर, पूर्ण विश्राम में।
सबसे सरल शब्दों में
सोने से पहले की धीमी चालें: बिल्ली-गाय, बच्चे-सा सिमटो, आधे मुड़ो, छोटा पुल बनाओ, फिर तारामछली बनकर लेट जाओ। इसके बाद नींद खुद तुम्हें ढूँढ़ने आती है।
साथ-साथ अभ्यास करें
तीरों से अपनी गति पर मुद्राएँ बदलें, या चलाएँ दबाकर हर मुद्रा को स्वयं समय लेने दें। कीबोर्ड के तीर भी चलते हैं।
धीमी बिल्ली-गाय
सहज साँस
छह इत्मीनान भरी आवृत्तियाँ — दिन की अकड़न साँस के साथ पिघलने दें।
यह आसन सीखें →मुद्रा 1 / 5
यह क्या है
सूर्यास्त के बाद के लिए संकलित, जब शरीर में दिन भर की बैठक जमा है: रीढ़ को लहराएँ, बालासन में टिकें, आगे झुकें, कोमल सेतु से छाती खोलें, और शवासन में समर्पित हो जाएँ। सब धीमा है, कुछ भी कठोर नहीं — बाद में भ्रामरी या सोऽहम् जोड़ लें तो रात तैयार है।
स्रोत: इस पृष्ठ के शास्त्रीय आसनों से धरमकिरा द्वारा संकलित — यह क्रम है, शास्त्र नहीं।
आवृत्तियाँ और लय
एक बार — जितना ज़रूरी लगे उससे भी धीमे। शवासन जितना चाहे चलने दें।
किसलिए किया जाता है
दिन का तनाव उतारना, गहरी नींद की तैयारी, स्क्रीन-भरी शामें।
अभ्यास से पहले — स्वास्थ्य सर्वोपरि
डिस्क या साइटिका की समस्या में आगे का झुकाव हल्का रखें; गर्भावस्था के अंतिम चरण में सेतु छोड़ें और सीधे शवासन की जगह बाईं करवट विश्राम करें।
हर मुद्रा, क्रम से
धीमी बिल्ली-गाय
सहज साँस
छह इत्मीनान भरी आवृत्तियाँ — दिन की अकड़न साँस के साथ पिघलने दें।
बालासन
सहज साँस
घुटनों पर झुककर माथा टिकाएँ, और पीछे की पसलियों में साँस भरें।
पश्चिमोत्तानासन
सहज साँस
टाँगें लम्बी, रीढ़ लम्बी, कोमलता से झुकें — आज गहराई का कोई महत्व नहीं।
कोमल सेतु
सहज साँस
कूल्हे केवल आधे उठाएँ; खुली छाती में पाँच साँसें, फिर धीरे-धीरे उतरें।
शवासन
सहज साँस
लेटकर सब छोड़ दें, और साँस को अपने-आप चलते देखें।