सीधे सामग्री पर जाएँ
Dharamkira

सम्पूर्ण योग

कोर और पाचन

आलिंगन, नाव, मरोड़ और लहर — वह क्रम जो पेट स्वयं अपने लिए रचता।

उदर-देखभाल6 मुद्राएँ · लगभग 11 मिनटकोमल

सबसे सरल शब्दों में

पेट के लिए छोटा-सा केयर-पैकेज: घुटने चिपटाओ, नाव-से तैरो, धीमे मोड वाली वॉशिंग-मशीन जैसे दाएँ-बाएँ घूमो, बिल्ली-सी पीठ लहराओ, फिर आराम। पेट थोड़ा खाली हो तो सबसे अच्छा!

साथ-साथ अभ्यास करें

तीरों से अपनी गति पर मुद्राएँ बदलें, या चलाएँ दबाकर हर मुद्रा को स्वयं समय लेने दें। कीबोर्ड के तीर भी चलते हैं।

पवनमुक्तासन

सहज साँस

घुटने छाती से, हल्का झूलना — जहाँ से आराम शुरू होता है वहीं से शुरुआत।

यह आसन सीखें

मुद्रा 1 / 6

यह क्या है

उदर की दो आवश्यकताओं के इर्द-गिर्द संकलित: कोमल बल और सच्ची मालिश। पवनमुक्त आलिंगन वहीं से शुरू होता है जहाँ से आराम शुरू होता है; नाव वह गहरा आधार गढ़ती है जो लम्बी बैठक में मुद्रा थामे रखता है; बैठा मरोड़ मध्य को दाएँ-बाएँ निचोड़ता है; बिल्ली-गाय सब फिर लहरा कर खोल देती है, और बालासन मुहर लगाता है। नाश्ते से पहले या भोजन के पर्याप्त बाद किया जाए तो यह मन्द, मेज़-दबे मध्य-भाग का शास्त्रीय उत्तर है।

स्रोत: इस पृष्ठ के शास्त्रीय आसनों से धरमकिरा द्वारा संकलित — यह क्रम है, शास्त्र नहीं।

आवृत्तियाँ और लय

लगभग खाली पेट एक बार — नाश्ते से पहले की सुबह, या भोजन के तीन घंटे बाद।

किसलिए किया जाता है

मन्द पाचन, अफारा, कमज़ोर मुद्रा-आधार, और वे बैठी साधनाएँ जो सधे मध्य पर निर्भर हैं।

अभ्यास से पहले — स्वास्थ्य सर्वोपरि

पूरा क्रम उदर को दबाता है: गर्भावस्था, हर्निया, अल्सर और पेट-शल्यक्रिया के बाद नाव व गहरे मरोड़ छोड़ें — कोमल आलिंगन और बिल्ली-गाय अधिकांश के लिए तब भी ठीक हैं। भोजन के तुरन्त बाद कभी नहीं।

हर मुद्रा, क्रम से

  1. पवनमुक्तासन

    सहज साँस

    घुटने छाती से, हल्का झूलना — जहाँ से आराम शुरू होता है वहीं से शुरुआत।

  2. नौकासन

    सहज साँस

    संतुलन और तैरना — मुड़े घुटने भी पूरी नाव हैं। दो छोटी आवृत्तियाँ।

  3. बैठा मरोड़ — दाएँ

    सहज साँस

    पहले ऊँची रीढ़, फिर धीमे निःश्वासों पर दाईं ओर।

  4. बैठा मरोड़ — बाएँ

    सहज साँस

    खोलकर उसी धैर्य से बाईं ओर।

  5. बिल्ली-गाय लहरें

    सहज साँस

    आठ धीमी लहरें — पेट हर लहर पर और कोमल।

  6. बालासन

    सहज साँस

    झुकें, पीठ में साँस भरें, सम्पन्न।