अधोमुख श्वानासन
अधोमुख = नीचे मुख, श्वान = कुत्ता — अँगड़ाई लेता श्वान; सूर्य नमस्कार में पर्वतासन
शरीर पर्वत-शिखर बनता है — हाथ-पैर धरती में, कूल्हे आकाश की ओर।
सबसे सरल शब्दों में
शरीर से उल्टा 'V' बनाओ: हाथ-पैर ज़मीन पर, कूल्हे हवा में ऊँचे — जैसे झपकी के बाद कुत्ता बड़ी-सी अँगड़ाई लेता है। घुटने मोड़ लो तो भी बिल्कुल ठीक है!
यह क्या है
हथेलियाँ और पैर धरती को दबाते हैं, कूल्हे ऊँचे उठते हैं, और शरीर उल्टे 'V' में मुड़ जाता है — कुत्ते की सुबह वाली मज़ेदार अँगड़ाई, और नाम भी वहीं से है। सूर्य नमस्कार चक्र में इसी आकार को परम्परा से पर्वतासन कहते हैं। यह एड़ियों से उँगलियों तक पूरी पिछली रेखा को खींचता है और बाँहों-कंधों को कोमलता से सबल करता है। मुड़े घुटने और उठी एड़ियाँ कोई चोरी नहीं; सीधी टाँगों से कहीं अधिक महत्व लम्बी रीढ़ का है।
अभ्यास से पहले — स्वास्थ्य सर्वोपरि
कलाई की चोट, उच्च रक्तचाप, ग्लूकोमा या गर्भावस्था के अंतिम चरण में इसे संक्षिप्त-कोमल रखें या कुर्सी पर हाथ रखकर करें; सिरदर्द में सिर को सहारा दें।
आसन में कैसे आएँ
चौपाए से पंजे मोड़ें और कूल्हों को ऊपर-पीछे उठाएँ।
दोनों हथेलियाँ पूरी तरह दबाएँ, उँगलियाँ फैलीं, बाँहें लम्बी।
कूल्हे ऊँचे भेजें; रीढ़ पूरी लम्बी हो सके इसलिए पहले घुटने मुड़े रखें।
सिर बाँहों के बीच सहज लटके, कान कोहनियों की सीध में।
एड़ियों को धरती की ओर बढ़ाएँ, पहुँचाने की ज़िद के बिना; 3–5 धीमी साँसें लें।
श्वास
धीमी उज्जायी-शैली की साँसें इस आसन में खूब जँचती हैं।
किसलिए किया जाता है
पिछली रेखा का खिंचाव, कंधों की शक्ति, और दिन के बीच ऊर्जा का नवीनीकरण।