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Dharamkira
त्योहार पंचांग
सिंहासन पर सीता सहित विराजमान राम, साथ में लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न, चरणों में हनुमान — राजा रवि वर्मा का लिथोग्राफ।
राम पंचायतनराजा रवि वर्मा, before 1906 (lithograph)

सीता (जानकी)

सीता नवमी

धरती की अपनी बेटी का प्राकट्य-दिवस — हल-रेखा की जानकी।

शुक्रवार, 14 मई 2027

तिथि: वैशाख शुक्ल नवमी

सबसे सरल शब्दों में

सीता माता का प्राकट्य दिवस — धरती की रेखा (हल-रेखा) में मिली नन्ही कन्या, जो पूरी रामायण के हृदय की शांत शक्ति बनीं।

कथा और उद्देश्य

मिथिला में यज्ञ-भूमि जोतते राजा जनक को हल-रेखा — 'सीता' — से एक तेजोमयी कन्या मिली, और निःसंतान राजा ने जाना कि धरती ने उन्हें पुत्री दी है। राम नवमी के ठीक एक चंद्र-मास बाद परंपरा उनकी अर्धांगिनी का प्राकट्य मनाती है।

सीता भूमिजा हैं — पृथ्वी से जन्मी — और उनकी पूरी कथा में धरती की गरिमा है: वह धैर्य जो दुर्बलता नहीं, वनवास में अडिगता, और अंत में अपनी शर्तों पर धरती-माँ में वापसी। सुहागिनें यह व्रत गृह-कल्याण के लिए रखती हैं — सीता साक्षात् लक्ष्मी हैं।

क्या किया जाता है

सीता-राम पूजन

श्रीराम के संग जानकी का पूजन — पीत पुष्प, अक्षत, खीर।

व्रत और कथा

दिवस-व्रत और रामायण से प्राकट्य-कथा का पाठ।

भूमि-वंदना

समुद्रवसने देवि — धरती से क्षमा माँगने वाला प्रातः श्लोक — आज अपने पूर्ण अर्थ में।

राम जाप

श्रीराम जय राम अथवा राम गायत्री — 108 बार।

श्रेष्ठ समय

पूजा मध्याह्न में — हल-रेखा से प्राकट्य की बेला।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • बिहार का सीतामढ़ी और नेपाल का जनकपुर — दोनों उनकी जन्मस्थली होने का गौरव रखते हैं; आज दोनों में मेले जुटते हैं।

  • वाल्मीकि उन्हें वैदेही, मैथिली, जानकी कहते हैं — भूमि, राज्य और ऋषि-राजा की पुत्री।

  • सीता — 'हल-रेखा' — ऋग्वेद के कृषि-सूक्त में पहले से देवी हैं: 'अर्वाची सुभगे भव सीते' (4.57.6)।

इस पर्व के मंत्र

टिप्पणी: कुछ पंचांग मध्याह्न-व्यापिनी तिथि से 15 मई 2027 मानते हैं। अपने कुल का पंचांग मानें।