राम
राम गायत्री
ॐ दाशरथये विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि । तन्नो रामः प्रचोदयात् ॥
Oṁ dāśarathaye vidmahe sītā-vallabhāya dhīmahi, tanno rāmaḥ pracodayāt
सरल उच्चारण: Om daa-sha-ra-tha-ye vid-ma-he, see-taa val-la-bhaa-ya dhee-ma-hi, tan-no raa-mah pra-cho-da-yaat
इस मंत्र के विषय में
राम गायत्री — दशरथ-नन्दन, सीता-वल्लभ श्रीराम से प्रार्थना कि वे बुद्धि को उस धर्म की ओर प्रेरित करें जिसे उन्होंने जीकर दिखाया।
अर्थ
हम दाशरथि को जानें; सीतावल्लभ का ध्यान करें; राम हमें प्रेरित करें। दोनों विशेषण सम्बन्ध-सूचक हैं — पुत्र, पति — क्योंकि राम का देवत्व पूर्णतः निभाए गए मानवीय सम्बन्धों के भीतर ही प्रकट है। उनसे प्रेरित होना उसी ओर बढ़ना है: धर्म नियम-पालन के रूप में नहीं — प्रेम, अपने पूरे भार सहित।
कब जपें
सतत राम-साधना — राम नवमी के व्रत और दैनिक अनुशासन; उन निर्णयों से पहले पढ़ी जाती है जहाँ उचित मार्ग और सरल मार्ग अलग-अलग हो जाते हैं।
शब्द-दर-शब्द
- दाशरथये विद्महेdāśarathaye vidmahe
- हम दशरथ-पुत्र को जानते हैं
- सीतावल्लभाय धीमहिsītā-vallabhāya dhīmahi
- सीता-वल्लभ का ध्यान करते हैं
- तन्नो रामः प्रचोदयात्tanno rāmaḥ pracodayāt
- राम हमें प्रेरित करें
स्रोत: राम-उपासना परंपरा का गायत्री-संग्रह
टिप्पणी: यहाँ प्रचलित रूप दिया गया है; कुल और क्षेत्रीय परंपराओं में शब्द-रूप थोड़ा भिन्न हो सकता है।

