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Dharamkira
त्योहार पंचांग
तेजोमय प्रभामंडल में मुकुटधारी सूर्यदेव, सात अश्वों के रथ पर आकाश में — रवि वर्मा प्रेस का प्रारंभिक लिथोग्राफ।
सूर्य नारायणरवि वर्मा प्रेस, early 1900s

सूर्य देव

रथ सप्तमी

सूर्य का अपना दिवस — सात अश्वों का रथ पूर्णतः वसंत की ओर मुड़ता है।

शनिवार, 13 फ़रवरी 2027

तिथि: माघ शुक्ल सप्तमी

सबसे सरल शब्दों में

सूर्य का अपना पर्व — जिस दिन सूर्य ने अपना सात घोड़ों का रथ उत्तर की ओर मोड़ा। प्रातः अर्घ्य के साथ सर्दी को विदा, वसंत को नमस्कार।

कथा और उद्देश्य

रथ सप्तमी सूर्य जयंती के रूप में मनाई जाती है — जिस दिन सूर्यदेव का तेज पहली बार जगत पर उतरा। उनका रथ, जिसके सात अश्व वेद के सात छंद और प्रकाश के सात रंग हैं, वर्ष के उष्ण अर्ध की ओर उत्तरगामी होता कल्पित है।

इस दिन की पहचान है अर्क (आक) के पत्तों को कंधों और सिर पर रखकर स्नान — सूर्य का अपना पौधा, जो पुरानी ऋतु के साथ रोग भी बहा ले जाता है।

क्या किया जाता है

अर्क-स्नान

सूर्योदय पर अर्क-पत्र देह से स्पर्श कराते हुए स्नान — इस दिन की मुख्य शुद्धि।

सूर्य अर्घ्य

ताम्र-पात्र से उदित सूर्य को अर्घ्य — लाल पुष्प और अक्षत सहित।

रथ की रंगोली

आँगन में सात अश्वों का रथ आलेखित; मध्य में दीप।

आदित्य जाप

प्रातः सूर्य के सम्मुख सूर्य के बारह नाम या सूर्य गायत्री।

श्रेष्ठ समय

सब कुछ सूर्योदय का है — अरुणोदय में स्नान-अर्घ्य ही इस दिन का पुण्य है।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • तिरुमला में रथ सप्तमी को भगवान एक ही दिन सातों वाहनों पर विहार करते हैं।

  • भीष्म अष्टमी — उत्तरायण में भीष्म के देह-त्याग का दिन — इसके अगली ही तिथि को आती है।

  • किसान इस दिन को कृषि-वर्ष के ग्रीष्म की ओर सच्चे मोड़ के रूप में देखते हैं।

इस पर्व के मंत्र