नवग्रह
सूर्य ग्रह मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
सरल उच्चारण
Om hraam hreem hraum sah soor-yaa-ya na-mah
Oṁ hrāṁ hrīṁ hrauṁ saḥ sūryāya namaḥ
इस मंत्र के विषय में
सूर्य का बीज-मंत्र — नौ ग्रहों में प्रथम, जिससे ग्रह-शांति का क्रम आरंभ होता है। ज्योतिष सूर्य को आत्मा, प्राणशक्ति, अधिकार और पिता का कारक मानता है।
अर्थ
ॐ — 'ह्रां ह्रीं ह्रौं सः' बीजाक्षरों सहित — सूर्य को प्रणाम। कुंडली में सूर्य आत्मा की अपनी अग्नि हैं: प्राणशक्ति, गरिमा, पितृ-पक्ष, सामने खड़े होने का बल। साधक प्रार्थना करता है कि यह अग्नि स्थिर जले — जीवन को झुलसाए नहीं, तपाकर सँवारे।
मंत्र कंठस्थ करें
पहली पंक्ति तब तक बोलें जब तक वह बिना पढ़े न आ जाए, फिर अगली पंक्ति जोड़कर दोनों बोलें, जब तक पूरा मंत्र अपने आप न आ जाए।
पूरा मंत्र
यह मंत्र एक ही पंक्ति का है। इसे पूरा सीखें, फिर अपनी पुनरावृत्ति सूची में जोड़ें ताकि यह जाँच के लिए वापस आए।
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
Oṁ hrāṁ hrīṁ hrauṁ saḥ sūryāya namaḥ
0अभी नहीं बोला
ग्यारह बार का लक्ष्य रखें। जैसे ही पूरा मंत्र अपने आप आने लगे, पढ़ना छोड़ दें।
प्रगति केवल इसी डिवाइस पर रहती है।
कब जपें
रविवार को और उन ग्रह-शांति प्रयोगों में जपा जाता है जहाँ सूर्य को बल देना हो — डगमगाता आत्मविश्वास, पिता व अधिकार से जुड़े विषय, और सार्वजनिक कार्यों का आरंभ।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव
- ह्रां ह्रीं ह्रौं सःhrāṁ hrīṁ hrauṁ saḥ
- इस ग्रह के बीजाक्षर
- सूर्यायsūryāya
- सूर्य के लिए
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: नवग्रह बीज-मंत्र परंपरा (ज्योतिष / ग्रह-शांति)
टिप्पणी: यहाँ प्रचलित रूप दिया गया है; कुल और क्षेत्रीय परंपराओं में शब्द-रूप थोड़ा भिन्न हो सकता है।

