
श्रीराम
राम नवमी
अयोध्या में मध्याह्न के क्षण श्रीराम का जन्म।
तिथि: चैत्र शुक्ल नवमी
सबसे सरल शब्दों में
श्रीराम का जन्मदिन! दोपहर के उस क्षण, जब वे अयोध्या में जन्मे, मंदिर गाते हैं, पालने झूलते हैं, और हम उस राजकुमार को याद करते हैं जिसने सदा सही को चुना।
कथा और उद्देश्य
चैत्र शुक्ल नवमी के मध्याह्न में कौशल्या-दशरथ के घर श्रीराम का जन्म हुआ — धर्म का मानव रूप में चलना। मंदिरों में रामायण-गान; घरों में दोपहर को पालना झुलाया जाता है।
मध्याह्न का उत्तर अयोध्या सरयू-तट के लाखों से देती है, और दक्षिण भिन्न रीति से — सीता-राम कल्याणम् से, जहाँ विवाह ही दिन का स्वरूप है। दोनों उनके विषय में सही हैं: राम पराक्रम से कम, आचरण से अधिक पूजे जाते हैं — वह अवतार जिसने मनुष्य के निभाने योग्य हर वचन निभाकर दिव्यता सिद्ध की।
क्या किया जाता है
मध्याह्न उत्सव
जन्म-क्षण दोपहर में कीर्तन और पालना-उत्सव से मनाया जाता है।
रामायण पाठ
बालकाण्ड या राम रक्षा स्तोत्र का पाठ; राम-नाम जाप।
पानकम् और प्रसाद
दक्षिण में गुड़-मिर्च का पानकम् — वसंत की गर्मी में शीतल प्रसाद।
श्रेष्ठ समय
मध्याह्न ही जन्म-मुहूर्त और पर्व का केंद्र है।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
इसी दिन चैत्र नवरात्रि पूर्ण होती है — देवी की नौ रात्रियाँ राम-दिवस पर सम्पन्न।
'श्री राम जय राम जय जय राम' इस दिन का अखंड जाप है।
वाल्मीकि जन्म का समय बताते हैं: चैत्र मास, नवमी तिथि, अदिति का नक्षत्र (पुनर्वसु), पाँच ग्रह उच्च स्थान में (बालकाण्ड, सर्ग 18)।