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Dharamkira
नंदगाँव की लठमार होली में भीड़ पर उड़ते पीले और गुलाबी रंग के बादल

त्योहार, और तिथियाँ क्यों बदलती हैं

हिन्दू त्योहार चाँद के हिसाब से चलते हैं, इसलिए हर वर्ष अलग दिन पड़ते हैं।

चित्र: Sachinghai09 (edit: Radomianin)CC BY-SA 4.0CC BY-SA 4.0

हिन्दू त्योहार चन्द्र-सौर पंचांग से चलते हैं। महीने चाँद से गिने जाते हैं, और ऋतुओं से तालमेल रखने के लिए लगभग हर 32 महीने में एक अधिक मास जोड़ा जाता है। इसीलिए दीवाली किसी वर्ष अक्टूबर में और किसी वर्ष नवम्बर में आती है। चन्द्र-मास का हर दिन एक तिथि है, और अधिकांश त्योहार किसी एक तिथि से बँधे हैं: दीवाली कार्तिक अमावस्या को, होली फाल्गुन पूर्णिमा को।

जिनके नाम पहले सुनेंगे: दीवाली (दीप, लक्ष्मी, नई शुरुआत), होली (रंग, वसन्त, कृष्ण), नवरात्रि और दुर्गा पूजा (देवी की नौ रातें), गणेश चतुर्थी (गणेश का दस दिन का वास), जन्माष्टमी (कृष्ण-जन्म), महाशिवरात्रि (शिव की रात), रक्षाबन्धन (भाई-बहन), और फ़सल के दिन — पोंगल, मकर संक्रान्ति, बैसाखी।

अनेक दिन व्रत भी हैं: किसी देवता या परिजन की मंगलकामना के लिए रखे गए उपवास। व्रत के नियम कठोर से प्रतीकात्मक तक हैं, और बीमार, गर्भवती, वृद्ध या बहुत छोटे बच्चों से कठिन व्रत की अपेक्षा नहीं की जाती।

धरमकिरा का पंचांग हर त्योहार की अगली तिथि — कई पंचांगों से मिलाई हुई — काउंटडाउन, कथा और उससे जुड़ी पूजा के साथ दिखाता है।

परंपरा के अपने शब्दों में

दीपज्योतिः परब्रह्म दीपज्योतिर्जनार्दनः । दीपो हरतु मे पापं दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते ॥

Dīpa-jyotiḥ parabrahma dīpa-jyotir janārdanaḥ, dīpo haratu me pāpaṁ dīpa-jyotir namo'stu te

दीप की ज्योति परब्रह्म है; दीप मेरे पाप हर ले। संध्या-दीप जलाते समय कहा जाता है।

एक नज़र में

त्योहार को उसकी तिथि कैसे मिलती है
अमावस्यापूर्णिमाअमावस्याशुक्ल पक्ष — उजला पखवाड़ा, १५ तिथियाँकृष्ण पक्ष — अँधेरा पखवाड़ा, १५ तिथियाँ
तिथि एक चंद्र-दिन है; महीने में लगभग पंद्रह-पंद्रह के दो पक्ष होते हैं। अधिकतर त्योहार तिथि से तय होते हैं — दीवाली कार्तिक अमावस्या को, होली फाल्गुन पूर्णिमा को — इसीलिए वे सौर कैलेंडर पर खिसकते रहते हैं।

जहाँ यह जीता है

  • गहरे नीले सांध्य आकाश में प्रकाशित पुरी के जगन्नाथ मंदिर के श्वेत शिखर

    संध्या में जगन्नाथ मंदिर, पुरी

    चित्र: KalyanpuranandCC BY-SA 4.0CC BY-SA 4.0
  • रात में ऊपर से लिया गया चित्र: पंक्तियों में सजे हज़ारों छोटे तेल के दीप मंदिर के प्रांगण को गरम रोशनी से भर रहे हैं

    हज़ारों तेल के दीप, राखेर उपोबाश, बारोदी मंदिर, ढाका

    चित्र: Muhammad Amdad Hossain (edit: W.carter)CC BY-SA 4.0CC BY-SA 4.0
  • विजयादशमी पर दहन से पहले मैदान में खड़े मूँछों और मुकुटों वाले तीन ऊँचे रंगीन पुतले

    दशहरे से पहले रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले

    चित्र: SnehrashmiCC BY-SA 4.0CC BY-SA 4.0

यह कहाँ से आता है

पंचांग की पद्धति पारम्परिक पंचांगों (तिथि, अधिक मास) के अनुसार; साइट की तिथियाँ 2026–2027 के कई प्रकाशित पंचांगों से मिलाई गई हैं।

धरमकिरा पर