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योग निद्रा

निद्रा = नींद — योगियों की निद्रा, विश्राम के भीतर जागरण

लेट जाइए, जागते रहिए, और ध्यान को धीरे-धीरे पूरे शरीर में घूमने दीजिए।

स्थिरताकोमल — सबके लिए

सबसे सरल शब्दों में

ऐसे लेट जाओ जैसे सोने वाले हो, पर भीतर "जागते रहने" की एक नन्ही बत्ती जली रहने दो। फिर शरीर के हर हिस्से को बारी-बारी नमस्ते कहो — अँगूठा, उँगलियाँ, हाथ, बाँह — पैर की उँगलियों तक। शरीर इतना ढीला हो जाता है कि तैरने जैसा लगता है।

यह क्या है

योग निद्रा ध्यान के रूप में किया गया विश्राम है: शवासन में लेटकर ध्यान को शरीर में अंग-अंग घुमाया जाता है — दायाँ अँगूठा, दूसरी उँगली, हथेली, कलाई — एक निश्चित क्रम में, जागने और नींद की सीमा पर ठहरते हुए। यह क्रम मन को बस एक छोटा-सा काम देता है, और शरीर, निगरानी से मुक्त होकर, पूरी तरह छूट जाता है। आज की प्रचलित विधि को बिहार योग विद्यालय के स्वामी सत्यानन्द ने प्राचीन तांत्रिक न्यास-परम्परा (शरीर के अंगों पर क्रम से चेतना रखना) से व्यवस्थित किया। परम्परा में इसे जीवित वाणी से कराया जाता है; स्मृति से करना — जैसा यह पृष्ठ सिखाता है — इसका स्व-निर्देशित रूप है।

स्रोत: तांत्रिक न्यास-परम्परा, जिसे स्वामी सत्यानन्द सरस्वती (बिहार योग विद्यालय, 1960 के दशक) ने योग निद्रा रूप में व्यवस्थित किया।

अभ्यास से पहले — स्वास्थ्य सर्वोपरि

लगभग सभी के लिए सुरक्षित। गहरे अवसाद, आघात या विस्मृति-प्रवृत्ति में लम्बे अंतर्मुखी अभ्यास कभी-कभी अस्थिर कर सकते हैं — सत्र छोटे रखें, आवश्यकता हो तो आँखें अधखुली, और किसी विश्वस्त विशेषज्ञ के साथ चलें। ऐसी जगह कभी न करें जहाँ नींद आ जाना असुरक्षित हो।

अभ्यास कैसे करें

  1. पीठ के बल लेटें (शवासन), बाँहें शरीर से थोड़ी दूर, हथेलियाँ ऊपर, आँखें बंद। कुछ ओढ़ लें — स्थिर होते शरीर की गर्मी घटती है।

  2. मन में एक शांत संकल्प करें: "मैं जागता/जागती रहूँगा/रहूँगी।"

  3. पूरे शरीर को एक साथ अनुभव करें — भारी, उष्ण, धरती पर टिका हुआ।

  4. ध्यान को दाईं ओर घुमाएँ: अँगूठा, हर उँगली, हथेली, कलाई, कोहनी, कंधा, बगल, कमर, कूल्हा, जाँघ, घुटना, पिंडली, टखना, एड़ी, तलवा, हर उँगली।

  5. यही बाईं ओर करें, फिर शरीर का पिछला भाग, अगला भाग, और सिर-चेहरा — अंत भौंहों के बीच के बिन्दु पर।

  6. कुछ देर सम्पूर्ण-शरीर बोध में ठहरें, सहज साँस को देखते हुए।

  7. समापन के लिए साँस गहरी करें, उँगलियाँ हिलाएँ, दाईं करवट लें, और धीरे-धीरे उठ बैठें।

अभी अभ्यास करें

अभ्यास टाइमर

20:00

पूर्ण सत्र आपकी साधना में जुड़ते हैं — केवल इसी डिवाइस पर।

कब और कितना

15–30 मिनट, दोपहर या सोने से पहले — वाहन चलाते समय कभी नहीं। कभी नींद आ जाना सामान्य है, असफलता नहीं; वह सीमा-रेखा ही अभ्यास है।

किसलिए किया जाता है

नींद कम हो तब गहरा विश्राम; थके मन की गाँठें खोलना; परम्परा इस अवस्था में एक छोटा संकल्प भी बोती है, जहाँ वह जड़ पकड़ता कहा जाता है।

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