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Dharamkira
त्योहार पंचांग
सिंहासन पर सीता सहित विराजमान राम, साथ में लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न, चरणों में हनुमान — राजा रवि वर्मा का लिथोग्राफ।
राम पंचायतनराजा रवि वर्मा, before 1906 (lithograph)

सीता-राम

विवाह पंचमी

सीता-राम का विवाह-दिवस — मिथिला बेटी देती है, संसार आदर्श पाता है।

मिथिला-अयोध्या — और जनकपुर, नेपाल
सोमवार, 14 दिसंबर 2026शुक्रवार, 3 दिसंबर 2027

तिथि: मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी

सबसे सरल शब्दों में

श्रीराम-सीता का विवाह-दिवस — जनकपुर और अयोध्या उस दिन को मनाते हैं जब धनुष टूटा और दो आदर्शों ने हाथ थामे।

कथा और उद्देश्य

जनक-सभा में शिव-धनुष अटल पड़ा था — जब तक राम ने उसे उठाकर, चढ़ाकर, तोड़ नहीं दिया; और सीता ने जयमाल से उन्हें वर लिया। मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को विवाह सम्पन्न हुआ: चार भाई, मिथिला की चार पुत्रियाँ, और एक ही मंडप में बँधी दो राज्यों की मैत्री।

नेपाल का जनकपुर — सीता की अपनी नगरी — दिनों तक उत्सव मनाता है: अयोध्या से आती बारात सम्मानित अतिथि, मैथिली विवाह-गीत, और राम-जानकी मंदिर ही मंडप। अनेक मिथिला परिवार, सीता को बेटी-सा प्रेम करते हुए, इस तिथि को वास्तविक विवाह टालते हैं — स्मरण करते हुए कि उनके विवाह ने उनसे कितना माँगा।

क्या किया जाता है

सीता-राम विवाहोत्सव

घर-मंदिर में विवाह-प्रसंग का गान या मंचन — विग्रहों का वर-वधू शृंगार।

मानस-पाठ

बालकांड के विवाह-प्रसंग — 'सिय-राम' एक ही शब्द की तरह, जैसा तुलसी ने लिखा।

दंपती सेवा

किसी वृद्ध दंपती का वस्त्र-भोजन से सम्मान — आदर्श की पूजा जीवितों में।

श्रेष्ठ समय

उत्सव संध्या में — पारंपरिक विवाह-लग्न की बेला।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • जनकपुर की विवाह पंचमी में दोनों देशों से लाखों आते हैं — एक सीमा-रहित पर्व।

  • मिथिला चित्रकला — विवाह का कोहबर — इसी विवाह के शृंगार से जन्मी मानी जाती है।

  • तुलसीदास ने मानस अयोध्या में आरंभ किया — उसके विवाह-छंद आज घर लौटते हैं।

इस पर्व के मंत्र