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Dharamkira
त्योहार पंचांग
वन-सरोवर में गुलाबी कमल पर खड़ी चतुर्भुज देवी लक्ष्मी, हाथों में कमल, साथ में श्वेत हाथी और हंस — राजा रवि वर्मा का चित्र।
लक्ष्मीराजा रवि वर्मा, c. 1896 (Ravi Varma Press print)

वरलक्ष्मी (महालक्ष्मी)

वरलक्ष्मी व्रतम्

वर देने वाली लक्ष्मी — एक शुक्रवार की पूजा, अष्टलक्ष्मी की कृपा।

दक्षिण भारत
2026 व्रतम्: शुक्रवार, 28 अगस्त 20262027 व्रतम्: शुक्रवार, 13 अगस्त 2027

तिथि: श्रावण पूर्णिमा से पूर्व का शुक्रवार।

सबसे सरल शब्दों में

दक्षिण भारत का लक्ष्मी-शुक्रवार — सजा हुआ कलशम् एक दिन के लिए देवी बनता है, और परिवार आठ प्रकार की समृद्धि माँगते हैं।

कथा और उद्देश्य

चारुमती की कथा में लक्ष्मी स्वयं मगध की एक भक्त स्त्री के स्वप्न में आईं और इस श्रावण-शुक्रवार को पूजन माँगा — और उसके द्वार से हर व्रती घर को मिलीं वरलक्ष्मी — 'वर देने वाली' — जो आठों लक्ष्मियाँ एक साथ हैं: धन, धान्य, धैर्य, संतान, विजय, विद्या और अधिक।

देवी-रूप सजा कलश — नारियल-मुख, रेशम, आभूषण, आम्रपत्र — व्रत का केंद्र है। स्त्रियाँ दाहिनी कलाई पर नौ गाँठों का 'सरडु' बाँधती हैं, और संध्या पड़ोस में हल्दी-कुमकुम से पूर्ण होती है: दक्षिण में समृद्धि बाँटने की वस्तु है।

क्या किया जाता है

कलश-लक्ष्मी

अक्षत पर स्थापित कलश का देवी-शृंगार; लक्ष्मी मंत्रों से आवाहन।

सरडु / डोरम

पूजा के बाद दाहिनी कलाई पर नौ-गाँठ पवित्र सूत्र।

नैवेद्य

पायसम्, ओब्बट्टु/पोळी, ताम्बूल अर्पण; हल्दी-कुमकुम संग प्रसाद-वितरण।

लक्ष्मी जाप

कलश के सम्मुख ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः — 108 बार।

श्रेष्ठ समय

पूजा प्रातः या पूर्वाह्न; अनेक घरों में सूत्र वर्ष-भर रहता है।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • व्रत को मंदिर नहीं चाहिए — देवी घर में, घर की स्त्रियों द्वारा स्थापित होती हैं।

  • 2026 में शुक्रवार स्वयं पूर्णिमा को है — राखी और वरलक्ष्मी एक ही दिन।

  • यह व्रत आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु में, और अनेक महाराष्ट्रीय व ओड़िया घरों में भी रखा जाता है।

इस पर्व के मंत्र

टिप्पणी: 2026 के कुछ पंचांगम् 21 अगस्त मानते हैं; व्यापक प्रचलित तिथि 28 अगस्त है। अपने कुल का पंचांगम् मानें।