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Dharamkira
मंत्र संग्रह

सार्वभौम

कराग्रे वसते — प्रातः कर-दर्शन

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती । करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् ॥

Karāgre vasate lakṣmīḥ kara-madhye sarasvatī, kara-mūle tu govindaḥ prabhāte kara-darśanam

सरल उच्चारण: Ka-raag-re va-sa-te laksh-meeh, ka-ra-madh-ye sa-ras-va-tee, ka-ra-moo-le tu go-vin-dah, pra-bhaa-te ka-ra-dar-sha-nam

शुभारंभसमृद्धि

इस मंत्र के विषय में

जागते ही अपनी हथेलियाँ देखते हुए कहा जाने वाला श्लोक — अग्रभाग में लक्ष्मी, मध्य में सरस्वती, मूल में गोविन्द: दिन का कर्म पवित्र है।

अर्थ

हाथों के अग्रभाग में लक्ष्मी का वास है; मध्य में सरस्वती का; मूल में गोविन्द का। इसलिए प्रातः अपने हाथों का दर्शन करें। यह श्लोक दिन का पहला सम्मान है — और वह अपने ही दोनों हाथों को। कहता है: कहीं और देखने से पहले यहाँ देखो — आज का दिन इन्हीं से बनेगा।

कब जपें

जागने पर पहला कृत्य — पाँव भूमि छूने से पहले, खुली हथेलियाँ आँखों के सामने रखकर कहा जाता है; बच्चों को यह दिन की पहली आदत रूप में सिखाया जाता है।

शब्द-दर-शब्द

कराग्रे वसते लक्ष्मीःkarāgre vasate lakṣmīḥ
कर के अग्रभाग में लक्ष्मी
करमध्ये सरस्वतीkara-madhye sarasvatī
मध्य में सरस्वती
करमूले तु गोविन्दःkara-mūle tu govindaḥ
मूल में गोविन्द
प्रभाते करदर्शनम्prabhāte kara-darśanam
प्रातः कर-दर्शन करें

स्रोत: पारंपरिक प्रातः-स्मरण श्लोक

टिप्पणी: अनेक परिवार तीसरा चरण 'करमूले स्थितो ब्रह्मा' कहते हैं — हाथ के मूल में ब्रह्मा। यहाँ गोविन्द वाला पाठ लिया गया है; दोनों पारंपरिक हैं।

कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती । करमूले तु गोविन्दः प्रभाते करदर्शनम् ॥

Karāgre vasate lakṣmīḥ kara-madhye sarasvatī, kara-mūle tu govindaḥ prabhāte kara-darśanam

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