
भगवान शिव
श्रावण सोमवार
शिव के मास में शिव का वार — वर्ष का सबसे कोमल, सबसे प्रिय व्रत।
तिथि: श्रावण मास का प्रत्येक सोमवार
सबसे सरल शब्दों में
श्रावण के सोमवार शिव के हैं — सरल व्रत, शिवलिंग पर थोड़ा जल, और बारिश के बीच 'ॐ नमः शिवाय'।
कथा और उद्देश्य
सोमवार सोम — चंद्र — का वार है, और चंद्र शिव की जटा में विश्राम करते हैं; इसलिए जब सोमवार श्रावण में पड़ते हैं — वह मास जो वर्षा शिव को अर्पित करती है — तो हर सोमवार छोटा पर्व बन जाता है। घर-घर सरल व्रत, शिवालय-दर्शन, और बेलपत्र सहित जल-दूध का अभिषेक।
मान्यता है कि पार्वती ने श्रावण की तपस्या से शिव को पाया — इसलिए कुँवारियाँ ये सोमवार (और सोलह सोमवार का संकल्प) योग्य जीवनसाथी के लिए, और गृहस्थ शांत बल के लिए रखते हैं। यह भक्ति का सबसे घरेलू रूप है: जल, पत्र और नियमितता।
क्या किया जाता है
सोमवार व्रत
सरल व्रत — फल, दूध या एक समय भोजन — प्रातः पूजा में संकल्प सहित।
अभिषेक
लिंग पर जल-दूध, बेलपत्र चिकनी ओर नीचे — एक पुष्प भी पर्याप्त।
शिव जाप
ॐ नमः शिवाय — 108 बार, प्रातः-सायं।
कथा
पारण से पूर्व सोमवार व्रत-कथा का पाठ।
श्रेष्ठ समय
अभिषेक प्रातः; व्रत-समापन संध्या पूजा के बाद।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
उत्तर (पूर्णिमांत) में सावन गुरु पूर्णिमा के बाद से; दक्खिन-दक्षिण (अमांत) में पखवाड़े बाद — उनके श्रावण सोमवार सितंबर तक जा सकते हैं।
2027 का (उत्तर-गणना) सावन पाँच सोमवारों वाला है — विशेष पूर्ण चक्र।
सोलह सोमवार का संकल्प परंपरा से श्रावण में ही आरंभ होता है।
इस पर्व के मंत्र
टिप्पणी: उपर्युक्त तिथियाँ उत्तर-भारतीय पूर्णिमांत गणना से हैं। अमांत क्षेत्रों (महाराष्ट्र, गुजरात, दक्षिण) में श्रावण 2027 = 2–31 अगस्त; सोमवार 9, 16, 23, 30 अगस्त।