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मंत्र संग्रह

शिव

पंचाक्षर मंत्र — ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय

Oṁ Namaḥ Śivāya

सरल उच्चारण: Om na-mah shi-vaa-ya

शांतिभक्ति

इस मंत्र के विषय में

शैव भक्ति का पंचाक्षरी हृदय, जो यजुर्वेद के श्रीरुद्रम् में समाहित है। शुद्धि और गहरी आंतरिक शांति का मंत्र।

अर्थ

मैं शिव को प्रणाम करता हूँ — मंगलमय को। 'शिव' उसका नाम है जो नित्य-कल्याणमय और नित्य-शुद्ध है: शांति के स्वामी नहीं, स्वयं शांति — अनुभव की हर लहर के नीचे का आधार। 'न-मः-शि-वा-य' — ये पाँच अक्षर पंच महाभूतों के प्रतिरूप माने जाते हैं; पृथ्वी से आकाश तक पूरा व्यक्तित्व एक ही प्रणाम में समा जाता है। कुछ माँगा नहीं जाता — यह वह विरल प्रार्थना है जिसकी समूची सामग्री समर्पण है।

कब जपें

परंपरा इसे काल-मुक्त मानती है — कोई भी घड़ी, कोई भी अवस्था, किसी तैयारी की आवश्यकता नहीं। यह सोमवार और पूरे सावन का आधार है, महाशिवरात्रि के चारों प्रहर इससे भरते हैं, और भय, शोक या अनिद्रा में यह श्वास का थामने वाला संगी है।

शब्द-दर-शब्द

oṁ
प्रणव, आदि नाद
नमःnamaḥ
प्रणाम, नमन
शिवायśivāya
मंगलमय शिव के लिए

स्रोत: तैत्तिरीय संहिता ४.५.८ — श्रीरुद्रम्, अनुवाक ८ ('नमः शिवाय च शिवतराय च'), कृष्ण यजुर्वेद

ॐ नमः शिवाय

Oṁ Namaḥ Śivāya

लक्ष्य
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