
विष्णु और पितृगण
मौनी अमावस्या
मौन और पुण्य-स्नान का दिन — हिन्दू वर्ष का सबसे शांत दिवस।
तिथि: माघ अमावस्या (उत्तर) · पौष अमावस्या (पश्चिम-दक्षिण) — रात वही है
आप कौन-सा पंचांग मानते हैं?
शुक्ल पक्ष का नाम हर जगह एक ही है। कृष्ण पक्ष उत्तर में एक मास का होता है और महाराष्ट्र, गुजरात व दक्षिण में उससे पिछले मास का — रात वही, नाम दो, और दोनों सही। चुनाव केवल इसी उपकरण पर रहता है।
सबसे सरल शब्दों में
मौन की अमावस्या — लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दिन भर न बोलने का प्रयास करते हैं, क्योंकि कभी-कभी सबसे चुप मुँह के पास सबसे साफ़ मन होता है।
कथा और उद्देश्य
मौनी अमावस्या माघ का महान स्नान-पर्व है, जिसमें मौन ही व्रत है। 'मौन' — मुनि से — सूर्योदय से धारण किया जाता है: वाणी नहीं, केवल भीतर का जप, ताकि मन एक पूरा दिन स्वयं को सुन सके।
प्रयागराज में यह वार्षिक माघ मेले का — और कुंभ के वर्षों में स्वयं कुंभ का — सबसे बड़ा स्नान-दिवस है। दक्षिण में यही अमावस्या 'थाई अमावस्या' है — पितरों के तर्पण का दिन।
क्या किया जाता है
मौन व्रत
सूर्योदय से मौन — पूरे दिन, या कम-से-कम प्रातः स्नान और जप तक।
स्नान
सूर्योदय से पूर्व पवित्र नदी में स्नान; घर पर स्नान-जल में कुछ बूँदें गंगाजल की — भावना वही है।
तर्पण और दान
पितरों को जल-तिल अर्पण; अन्न, कंबल, तिल का दान।
आंतरिक जाप
सोऽहम् या ॐ नमो नारायणाय का मानसिक जप — स्वयं श्वास का मंत्र।
श्रेष्ठ समय
ब्राह्म मुहूर्त और प्रातः काल स्नान के लिए; मौन संकल्प-भर रखा जाता है।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
2025 महाकुंभ में मौनी अमावस्या ही सबसे बड़ा स्नान-दिवस थी — एक दिन में करोड़ों स्नानार्थी।
मान्यता है कि इस दिन प्रत्येक नदी का जल गंगा हो जाता है।
कम बोलना सबके लिए सुलभ तप है, ऐसा शास्त्र कहते हैं — यह दिन उसे उत्सव बना देता है।