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मंत्र संग्रह

सार्वभौम

गङ्गे च यमुने — सप्त नदियाँ

गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति । नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु ॥

Gaṅge ca yamune caiva godāvari sarasvati, narmade sindhu kāveri jale'smin sannidhiṁ kuru

सरल उच्चारण: Gan-ge cha ya-mu-ne chai-va go-daa-va-ri sa-ras-va-ti, nar-ma-de sin-dhu kaa-ve-ri, ja-le-smin san-ni-dhim ku-ru

शुभारंभआरोग्य

इस मंत्र के विषय में

स्नान या पूजा से पहले जल में सात पवित्र नदियों का आवाहन — हर जलपात्र में गंगा का वास हो सकता है।

अर्थ

हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु, कावेरी — इस जल में अपनी उपस्थिति (सान्निध्य) दो। 'सन्निधिं कुरु' — 'उपस्थित हो जाओ' — यही कार्यकारी प्रार्थना है: नदियाँ लाई नहीं जातीं, पहचानी जाती हैं। एक कलश जल, सम्यक् सम्बोधन पाकर, पूरा तीर्थ-भूगोल धारण कर लेता है; गृहस्थ की भोर के लिए तीर्थयात्रा ध्यान में सिमट आती है।

कब जपें

प्रतिदिन स्नान-जल पर और हर पूजा के आरंभ में कलश पर कहा जाता है — उस जल के अर्पण या छिड़काव से पहले।

शब्द-दर-शब्द

गङ्गे च यमुने चैवgaṅge ca yamune caiva
हे गंगा और यमुना
गोदावरि सरस्वतिgodāvari sarasvati
हे गोदावरी और सरस्वती
नर्मदे सिन्धु कावेरिnarmade sindhu kāveri
हे नर्मदा, सिन्धु, कावेरी
जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरुjale'smin sannidhiṁ kuru
इस जल में सान्निध्य करो

स्रोत: पारंपरिक स्नान / पूजा आवाहन

गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति । नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु ॥

Gaṅge ca yamune caiva godāvari sarasvati, narmade sindhu kāveri jale'smin sannidhiṁ kuru

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