सार्वभौम
सोऽहम् — श्वास मंत्र
सोऽहम्
So'ham
सरल उच्चारण: So-ham
विद्या और ज्ञानशांति
इस मंत्र के विषय में
वह मंत्र जो श्वास स्वयं जपती है — भीतर आती साँस में 'सो', बाहर जाती में 'हम्' — उपनिषद की अनुभूति: वह मैं हूँ।
अर्थ
सः — वह; अहम् — मैं हूँ। उलट दें तो यही ध्वनियाँ 'हंस' बन जाती हैं — मुक्त आत्मा का प्रतीक; श्वास के साथ दोहराने पर ये कही नहीं जातीं, सुनाई देने लगती हैं। दावा उपनिषदों का शिखर है — सादृश्य नहीं, तादात्म्य — और वह दर्शन की तरह नहीं, उस बात की तरह दिया गया है, जो देह दिन में हज़ारों बार पहले से कह रही है।
कब जपें
मौन ध्यान का मंत्र — किसी भी बैठक में श्वास पर निहारा जाता है, रात में सोने से पहले, और मननशीलों द्वारा निरंतर; किसी विधि की आवश्यकता नहीं।
शब्द-दर-शब्द
- सःsaḥ
- वह — परब्रह्म
- अहम्aham
- मैं हूँ
स्रोत: ईश उपनिषद १६; बृहदारण्यक उपनिषद १.४.१; हंस उपनिषद (श्वास-साधना)

