विष्णु
अष्टाक्षर मंत्र
ॐ नमो नारायणाय
Oṁ Namo Nārāyaṇāya
सरल उच्चारण: Om na-mo naa-raa-ya-naa-ya
भक्तिशांति
इस मंत्र के विषय में
नारायण उपनिषद में दिया गया अष्टाक्षर मंत्र — समस्त प्राणियों के आश्रय नारायण की शरण।
अर्थ
ॐ, नारायण को प्रणाम। नाम दो प्रकार से पढ़ा जाता है: नर-अयन — समस्त जीवों का आश्रय; और मनुस्मृति (१.१०) के अनुसार — जिनका पहला अयन (आश्रय) नार अर्थात् जल था। दोनों ही रूप में इसे कहना परमात्मा को 'घर' कहकर पुकारना है। ये आठ अक्षर एक ही गति करते हैं: उस ओर लौटना, जहाँ सब कुछ पहले से विश्राम पा रहा है।
कब जपें
एकादशी और गुरुवार को, सोने से पहले मन की घर-वापसी रूप में, और चिंता की घड़ियों में जपा जाता है — अष्टाक्षर परंपरा का शरण-मंत्र है।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- नमोnamo
- प्रणाम
- नारायणायnārāyaṇāya
- समस्त प्राणियों के आश्रय नारायण के लिए
स्रोत: नारायण उपनिषद

