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Dharamkira
त्योहार पंचांग
सिंह पर सवार, अनेक भुजाओं में शस्त्र लिए महिषासुर का वध करती देवी दुर्गा — रवि वर्मा प्रेस का चित्र।
दुर्गा महिषासुरमर्दिनीरवि वर्मा प्रेस, c. 1910

पितृगण और देवी दुर्गा

महालया

वर्ष की चूल — भोर में पितरों का तर्पण, और उसी श्वास से माँ का आवाहन।

विशेषतः बंगाल — और हर स्मरण करने वाला
शनिवार, 10 अक्टूबर 20262027 (अमावस्या तिथि 30 सितंबर तक व्यापी; कुछ सूचियाँ वही दिन देती हैं): बुधवार, 29 सितंबर 2027

तिथि: सर्वपितृ अमावस्या — आश्विन अमावस्या (उत्तर) · सर्वपितृ अमावस्या — भाद्रपद अमावस्या (पश्चिम-दक्षिण)रात वही है

आप कौन-सा पंचांग मानते हैं?

शुक्ल पक्ष का नाम हर जगह एक ही है। कृष्ण पक्ष उत्तर में एक मास का होता है और महाराष्ट्र, गुजरात व दक्षिण में उससे पिछले मास का — रात वही, नाम दो, और दोनों सही। चुनाव केवल इसी उपकरण पर रहता है।

सबसे सरल शब्दों में

जिस भोर माँ दुर्गा धरती की ओर चलती हैं — बंगाल पौ फटने से पहले जागकर 'महिषासुर मर्दिनी' सुनता है, और पितृ पक्ष पूर्ण होता है।

कथा और उद्देश्य

महालया पितृपक्ष को सर्वपितृ अमावस्या से पूर्ण करती है — वह अमावस्या जिसका तर्पण हर पितर तक पहुँचता है: नामी-अनामी, स्मृत-विस्मृत। लाखों लोग भोर में तिल-जल लिए नदियों में खड़े होते हैं; दिवंगतों के प्रति जो भी अधूरा रहा, आज पूरा होता है।

और उसी दिन देवीपक्ष खुलता है। बंगाल में महालया का अर्थ ही है भोर चार बजे का रेडियो — 1931 से गूँजता बीरेन्द्रकृष्ण भद्र का 'महिषासुरमर्दिनी' पाठ, जिसके साथ माँ का घर की ओर प्रस्थान माना जाता है। मूर्तिकार आज दुर्गा की आँखें आँकते हैं — चोक्खु दान — और पंडाल साँस रोक लेते हैं।

क्या किया जाता है

तर्पण

भोर में दक्षिणाभिमुख जल-तिल अर्पण, पितरों के नाम सहित — अथवा समस्त पितरों के निमित्त।

अन्न-दान

दिन के अतिथियों — ब्राह्मणों और दीनों — को भोजन, और गौ, श्वान, काक, पिपीलिका तथा देवताओं के लिए पंचबलि के पाँच ग्रास।

चंडी-पाठ

भोर में महिषासुरमर्दिनी या दुर्गा सप्तशती श्रवण — देवीपक्ष का शुभारंभ उन्हीं के स्तोत्र से।

श्रेष्ठ समय

तर्पण प्रातः; श्राद्ध शास्त्र-सम्मत अपराह्न में; चंडी-पाठ ब्राह्म मुहूर्त में।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • नब्बे वर्ष से अधिक पुराना वह प्रसारण आज भी वर्ष में एक भोर बंगाल में सर्वाधिक सुना जाता है।

  • कोलकाता के घाटों और प्रयाग-संगम पर तर्पण कंधे-से-कंधा किलोमीटरों चलता है।

  • कर्नाटक और आंध्र में यही अमावस्या 'महालय अमावास्ये' है, तर्पण सहित; तेलंगाना में इसी संध्या बतुकम्मा आरंभ होता है।

इस पर्व के मंत्र

टिप्पणी: 2027: दृक् पंचांग और अधिकांश सूचियाँ 29 सितंबर देती हैं; अमावस्या तिथि 30 सितंबर तक व्यापी है और कुछ सूचियाँ वही दिन मानती हैं। स्थानीय पंचांग निर्णायक।