अन्य देव
पितृ नाम-मंत्र
ॐ पितृभ्यो नमः
Oṁ Pitṛbhyo Namaḥ
सरल उच्चारण: Om pi-tri-bhyo na-mah
इस मंत्र के विषय में
पितरों का सरलतम स्मरण — वह प्रणाम जो कोई भी गृहस्थ बिना पुरोहित के अपने वंश को कर सकता है।
अर्थ
ॐ, पितरों को प्रणाम — पहले जा चुके माता-पिता, पुरखे। मंत्र के तीन शब्द वह ऋण वहन करते हैं, जिसे कोई दान नहीं चुकाता: देह, नाम और हमारी आधी आदतें उन्हीं की हैं। जल-तिल के साथ अर्पित यह स्मरण वही करता है, जो स्मरण कर सकता है — वंश से कहता है कि वह भुलाया नहीं गया; और माँगता है कि नीचे उसकी छाया नहीं, उसका आशीर्वाद उतरे।
कब जपें
सर्वोपरि पितृपक्ष — पुरखों का पखवाड़ा — तथा श्राद्ध-तर्पण, अमावस्या के अर्पण और पारिवारिक स्मृति-दिवसों पर।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- पितृभ्योpitṛbhyo
- पितरों के लिए
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: पारंपरिक नाम-मंत्र; पूर्ण तर्पण विधि कुल/पुरोहित-सापेक्ष
टिप्पणी: विधिवत् श्राद्ध-तर्पण अपने कुल की परंपरा और पुरोहित से होते हैं। यह मंत्र सरल गृहस्थ-स्मरण है — उन विधियों का विकल्प नहीं।