सार्वभौम
शांति मंत्र — त्रिविध शांति
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः
सरल उच्चारण
Om shaan-tih shaan-tih shaan-tih
Oṁ Śāntiḥ Śāntiḥ Śāntiḥ
इस मंत्र के विषय में
वैदिक पाठ और हर उपनिषद-पाठ के समापन पर बोली जाने वाली शांति-प्रार्थना — ॐ, फिर तीन बार 'शान्तिः'।
अर्थ
ॐ — शांतिः, शांतिः, शांतिः। तीन उच्चारण दोहराव नहीं, तीन लक्ष्य हैं: जो भीतर से उठता है (आध्यात्मिक), जो प्राणियों से आता है (आधिभौतिक), और जो किसी के वश से परे उतरता है (आधिदैविक)। तीनों स्रोत गिनाकर पाठ स्वीकार करता है कि जीवन कितना अरक्षित है — और हर द्वार को एक ही शब्द से उत्तर देता है।
मंत्र कंठस्थ करें
पहली पंक्ति तब तक बोलें जब तक वह बिना पढ़े न आ जाए, फिर अगली पंक्ति जोड़कर दोनों बोलें, जब तक पूरा मंत्र अपने आप न आ जाए।
पूरा मंत्र
यह मंत्र एक ही पंक्ति का है। इसे पूरा सीखें, फिर अपनी पुनरावृत्ति सूची में जोड़ें ताकि यह जाँच के लिए वापस आए।
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः
Oṁ Śāntiḥ Śāntiḥ Śāntiḥ
0अभी नहीं बोला
ग्यारह बार का लक्ष्य रखें। जैसे ही पूरा मंत्र अपने आप आने लगे, पढ़ना छोड़ दें।
प्रगति केवल इसी डिवाइस पर रहती है।
कब जपें
प्रार्थनाओं, पाठों और सभाओं का समापन; कलह के बाद, विदाई पर, और प्रति रात्रि सोने से पहले — ताकि दिन तीनों ओर से शांति में समाप्त हो।
शब्द-दर-शब्द
- शान्तिः (१)śāntiḥ
- आध्यात्मिक — अपने भीतर से शांति
- शान्तिः (२)śāntiḥ
- आधिभौतिक — प्राणियों से शांति
- शान्तिः (३)śāntiḥ
- आधिदैविक — प्रकृति और दैव से शांति
स्रोत: उपनिषदों की शांति-पाठ परंपरा

