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Dharamkira
त्योहार पंचांग
व्याघ्रचर्म पर ध्यानमग्न बैठे शिव, सिर पर नाग-फन, पास में पार्वती और पीछे काशी के घाट — लगभग 1895 का रंगीन लिथोग्राफ।
ध्यानमग्न शिवलोकप्रिय रंगीन लिथोग्राफ, कलकत्ता (ब्रिटिश म्यूज़ियम एल्बम), c. 1895

शिव

महाशिवरात्रि

शिव की महारात्रि — जागरण, व्रत और चारों प्रहर अभिषेक।

रविवार, 15 फ़रवरी 2026शनिवार, 6 मार्च 2027

तिथि: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी (उत्तर) · माघ कृष्ण चतुर्दशी (पश्चिम-दक्षिण)रात वही है

आप कौन-सा पंचांग मानते हैं?

शुक्ल पक्ष का नाम हर जगह एक ही है। कृष्ण पक्ष उत्तर में एक मास का होता है और महाराष्ट्र, गुजरात व दक्षिण में उससे पिछले मास का — रात वही, नाम दो, और दोनों सही। चुनाव केवल इसी उपकरण पर रहता है।

सबसे सरल शब्दों में

शिव जी की महान रात। लोग जागते हैं, शिवलिंग पर जल-दूध चढ़ाते हैं और 'ॐ नमः शिवाय' जपते रहते हैं — यह शांत रात है, शोर वाली नहीं।

कथा और उद्देश्य

महाशिवरात्रि वह रात्रि है जो परंपरा में शिव को सर्वाधिक प्रिय है — कहीं उनके ब्रह्मांडीय तांडव की रात, कहीं हलाहल विष कंठ में धारण कर सृष्टि की रक्षा की रात, कहीं शिव-पार्वती विवाह की रात।

अधिकांश पर्वों से भिन्न, यह रात्रि का पर्व है: भक्त व्रत रखते हैं, जागरण करते हैं, और चारों प्रहर शिवलिंग का अभिषेक करते हुए भोर तक पूजा करते हैं।

इसकी सबसे प्रिय कथा उस शिकारी की है जो रात काटने बेल के पेड़ पर बैठा और अनजाने पत्ते-पर-पत्ता नीचे के शिवलिंग पर गिराता रहा — अनजाने पूजन से ही तर गया। यह रात शिव की सरलता सिखाती है: वे जागरण गिनते हैं, योग्यता नहीं।

क्या किया जाता है

व्रत और जागरण

दिन का उपवास और शिव-स्मरण में रात्रि जागरण।

रुद्राभिषेक

जल, दूध, दही, घृत और मधु से लिंगाभिषेक — प्रत्येक चरण में बेलपत्र अर्पण।

चार प्रहर पूजा

रात्रि के प्रत्येक प्रहर में अभिषेक — हर प्रहर का अपना अर्पण।

महामृत्युंजय जाप

महामृत्युंजय मंत्र की 108 आवृत्ति, या रात्रि-भर ॐ नमः शिवाय।

श्रेष्ठ समय

निशिता काल (मध्यरात्रि) पूजा का केंद्र है; संध्या से भोर तक चार प्रहर।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • हर मास की कृष्ण चतुर्दशी शिवरात्रि है; फाल्गुन की यह रात्रि 'महा' शिवरात्रि है।

  • बेलपत्र शिव को अतिप्रिय — चिकनी सतह नीचे की ओर रखकर अर्पित होते हैं।

  • उज्जैन, काशी और ज्योतिर्लिंगों में यह रात्रि अखंड भक्त-प्रवाह देखती है।

इस पर्व के मंत्र