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Dharamkira
त्योहार पंचांग
नारियल रखा कलश, श्वेत-लाल पुष्पमालाओं से लिपटा, दोनों ओर केले के पत्ते।
पूजा के लिए सजा कलश, कर्नाटकMikeLynch, 2011

अमृत-कलश — और स्वयं नदियाँ

कुंभ मेला (नासिक सिंहस्थ 2027)

पृथ्वी का विशालतम समागम — अमृत की चार बूँदें, चार नगर, एक अखंड तीर्थ-परंपरा।

नासिक–त्र्यंबकेश्वर (इस चक्र में)
ध्वजारोहण: शनिवार, 31 अक्टूबर 2026प्रथम अमृत स्नान: सोमवार, 2 अगस्त 2027द्वितीय अमृत स्नान: मंगलवार, 31 अगस्त 2027तृतीय अमृत स्नान (नासिक): शनिवार, 11 सितंबर 2027तृतीय अमृत स्नान (त्र्यंबकेश्वर): रविवार, 12 सितंबर 2027

तिथि: जब बृहस्पति सिंह राशि में हों — इसीलिए 'सिंहस्थ' — गोदावरी-तट नासिक में।

सबसे सरल शब्दों में

संसार का सबसे बड़ा समागम — हर बारह वर्ष, जहाँ अमृत की बूँदें गिरीं, वहाँ करोड़ों साथ स्नान करते हैं। 2027 में नासिक की बारी है।

कथा और उद्देश्य

देव-असुरों के समुद्र मंथन से अमृत-कलश निकला तो बारह दिनों की दिव्य उड़ान चली — और चार बूँदें धरती पर गिरीं: प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन, नासिक। बृहस्पति के द्वादश-वर्षीय चक्र के साथ चारों बारी-बारी कुंभ रचते हैं; गुरु के सिंह-प्रवेश पर नासिक की गोदावरी अमृत-धारा बनती है।

अखाड़े अपनी पेशवाई शोभायात्राओं से पधारते हैं; भोर के अमृत स्नानों का नेतृत्व नागा संन्यासी करते हैं; और महीनों नदी-तट लाखों की अस्थायी नगरी रहता है। मान्यता है कि कुंभ का एक स्नान सहस्र सामान्य तीर्थों का पुण्य देता है — पर इसका गहनतम दृश्य सरल है: भारत की समस्त आस्था, एक ही जल की ओर पैदल।

क्या किया जाता है

अमृत स्नान

महापर्वों पर गोदावरी-स्नान — परंपरा-क्रम से अखाड़ों के पश्चात।

कल्पवास और सत्संग

अवधि-भर तट पर संयम-वास; कथाएँ और अखाड़ा-दर्शन।

घर से

स्नान-तिथियों पर गोदावरी-स्मरण सहित भोर-स्नान — कुंभ संकल्प की उपस्थिति भी स्वीकारता है।

श्रेष्ठ समय

अमृत स्नान ब्राह्म मुहूर्त से; मेला-नगरी ध्वजारोहण (31 अक्तूबर 2026) से मध्य-2028 तक।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • प्रयागराज के 2025 महाकुंभ में सप्ताहों के दौरान करोड़ों-करोड़ स्नानार्थी आए।

  • नासिक का कुंभ गोदावरी — 'दक्षिण गंगा' — पर एकमात्र है।

  • कुंभ मेला यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में अंकित है।

इस पर्व के मंत्र

टिप्पणी: तिथियाँ आधिकारिक सिंहस्थ कार्यक्रम से; प्रशासनिक परिवर्तन संभव — यात्रा से पूर्व पुष्टि करें।