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Dharamkira
त्योहार पंचांग
व्याघ्रचर्म पर ध्यानमग्न बैठे शिव, सिर पर नाग-फन, पास में पार्वती और पीछे काशी के घाट — लगभग 1895 का रंगीन लिथोग्राफ।
ध्यानमग्न शिवलोकप्रिय रंगीन लिथोग्राफ, कलकत्ता (ब्रिटिश म्यूज़ियम एल्बम), c. 1895

शिव (त्रिपुरारि) · विष्णु

कार्तिक पूर्णिमा · देव दीपावली

देवताओं की दीपावली — काशी के घाटों पर लाखों दीप।

मंगलवार, 24 नवंबर 2026रविवार, 14 नवंबर 2027

तिथि: कार्तिक पूर्णिमा

सबसे सरल शब्दों में

साल की सबसे उजली पूर्णिमा — घाट हज़ारों दीयों से जगमगाते हैं, और काशी में देव दीपावली पर स्वयं देवता उतरते कहे जाते हैं।

कथा और उद्देश्य

इसी पूर्णिमा को शिव ने त्रिपुरासुर के त्रिपुरों का संहार किया, और देवताओं ने काशी में दीप जलाए — देवताओं की दीपावली, जो आज भी वाराणसी के घाटों पर इसी रात मनती है। पवित्र नदियों का स्नान मास-भर का पुण्य देता है।

वैष्णवों के लिए यही चन्द्रमा महीने भर के कार्तिक व्रत का समापन है, और सिखों के लिए गुरु नानक की जन्म-पूर्णिमा: एक रात, भक्ति की तीन धाराएँ।

क्या किया जाता है

कार्तिक स्नान

मास का समापन-स्नान।

दीपदान

नदियों में दीप प्रवाह, घाटों पर दीपमालाएँ।

श्रेष्ठ समय

स्नान ब्रह्ममुहूर्त में; दीपदान प्रदोष में।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • भीष्म पंचक — कार्तिक शुक्ल एकादशी से रखा जाने वाला पाँच दिन का व्रत — इसी पूर्णिमा को पूर्ण होता है।

  • पुष्कर मेला इसी पूर्णिमा पर चरम पर होता है।

  • तमिलनाडु का कार्त्तिगै दीपम — तिरुवण्णामलै का पर्वत-दीप — तमिल कार्त्तिगै मास के कृत्तिका दिवस पर जलता है: प्रायः यही पूर्णिमा (24 नवंबर 2026), पर कुछ वर्षों में एक मास बाद (11 दिसंबर 2027)।

इस पर्व के मंत्र