
श्रीकृष्ण
कृष्ण जन्माष्टमी
कंस के कारागार में मध्यरात्रि श्रीकृष्ण-जन्म।
तिथि: भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र (उत्तर) · श्रावण कृष्ण अष्टमी, रोहिणी नक्षत्र (पश्चिम-दक्षिण) — रात वही है
आप कौन-सा पंचांग मानते हैं?
शुक्ल पक्ष का नाम हर जगह एक ही है। कृष्ण पक्ष उत्तर में एक मास का होता है और महाराष्ट्र, गुजरात व दक्षिण में उससे पिछले मास का — रात वही, नाम दो, और दोनों सही। चुनाव केवल इसी उपकरण पर रहता है।
सबसे सरल शब्दों में
श्रीकृष्ण का जन्मदिन, आधी रात को! हम व्रत रखते हैं, गाते हैं, बाल-कान्हा का पालना झुलाते हैं, और कहीं-कहीं दही-हांडी फोड़ने को मानव-पिरामिड बनते हैं — बिल्कुल उनकी तरह।
कथा और उद्देश्य
मध्यरात्रि, बंद कारागार, उफनती यमुना — देवकी की आठवीं संतान का जन्म हुआ और ताले स्वयं खुल गए। वासुदेव नवजात को गोकुल ले चले, शेषनाग ने वर्षा से छत्र किया।
जन्म-क्षण (मध्यरात्रि) तक व्रत, फिर बाल गोपाल का अभिषेक और भोर तक भजन — और महाराष्ट्र में अगली सुबह दही-हांडी की मानव-पिरामिडें।
क्या किया जाता है
निशिता तक व्रत
दिन-भर उपवास; जन्मोत्सव मध्यरात्रि (निशिता) में।
बाल गोपाल अभिषेक
पंचामृत स्नान, नए वस्त्र, पालना, माखन-मिश्री भोग।
जाप-कीर्तन
रात्रि-भर महामंत्र और द्वादशाक्षर मंत्र।
श्रेष्ठ समय
निशिता काल जन्म-मुहूर्त है; पारण अगले दिन कुल-परंपरानुसार।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
मथुरा-वृंदावन में पूरा पखवाड़ा उत्सव बन जाता है।
'छप्पन भोग' गोवर्धन के सात दिनों का स्मरण है — आठ आहार प्रतिदिन के हिसाब से छप्पन।
इस्कॉन और अनेक वैष्णव मन्दिर रोहिणी नक्षत्र से तिथि गिनते हैं, जो स्मार्त तिथि से एक दिन बाद भी पड़ सकती है।
इस पर्व के मंत्र
टिप्पणी: स्मार्त-वैष्णव गणनाएँ 2026 में 4/5 सितंबर में विभाजित हैं; व्यापक लोक-परंपरा 4 को है।