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विष्णु

द्वादशाक्षर मंत्र

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

सरल उच्चारण

Om na-mo bha-ga-va-te vaa-su-de-vaa-ya

Oṁ Namo Bhagavate Vāsudevāya

भक्तिशांति

इस मंत्र के विषय में

वासुदेव — अंतर्यामी श्रीकृष्ण — के प्रति समर्पण का द्वादशाक्षर मंत्र। भागवत परंपरा का केंद्रीय मंत्र।

अर्थ

ॐ, भगवान वासुदेव को प्रणाम। वासुदेव अंतर्यामी कृष्ण हैं — 'वस्' धातु से: जिनमें सब प्राणी बसते हैं और जो सब प्राणियों में बसते हैं। बारह अक्षरों का यह मंत्र भागवत परंपरा का पूरा पथ एक पंक्ति में है — कोई माँग नहीं, एक संबोधन: भगवान के व्यक्तित्व की ओर मुड़ना और स्वयं को सौंप देना।

मंत्र कंठस्थ करें

पहली पंक्ति तब तक बोलें जब तक वह बिना पढ़े न आ जाए, फिर अगली पंक्ति जोड़कर दोनों बोलें, जब तक पूरा मंत्र अपने आप न आ जाए।

पूरा मंत्र

यह मंत्र एक ही पंक्ति का है। इसे पूरा सीखें, फिर अपनी पुनरावृत्ति सूची में जोड़ें ताकि यह जाँच के लिए वापस आए।

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

Oṁ Namo Bhagavate Vāsudevāya

0अभी नहीं बोला

ग्यारह बार का लक्ष्य रखें। जैसे ही पूरा मंत्र अपने आप आने लगे, पढ़ना छोड़ दें।

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कब जपें

अनेक वैष्णवों का आजीवन नित्य-जाप — विशेषतः प्रातः और एकादशी के दिन, भागवत-पाठ से पहले, और हर उस घड़ी में जो प्रयास नहीं, समर्पण माँगती हो।

शब्द-दर-शब्द

ॐoṁ
प्रणव, आदि नाद
नमोnamo
प्रणाम
भगवतेbhagavate
षड्गुण-ऐश्वर्य से युक्त भगवान के लिए
वासुदेवायvāsudevāya
वासुदेव — सर्वव्यापी श्रीकृष्ण — के लिए

स्रोत: भागवत परंपरा (श्रीमद्भागवत पुराण)

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय

Oṁ Namo Bhagavate Vāsudevāya

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