
हनुमान
हनुमान जयंती
पवनपुत्र का प्राकट्य — प्रेम की सेवा में बल।
तिथि: चैत्र पूर्णिमा
सबसे सरल शब्दों में
हनुमान जी का जन्मदिन — उस सबसे बलवान, सबसे विनम्र वीर का उत्सव, जो सागर लाँघ सकते थे पर श्रीराम के आगे बालक-से झुकते थे।
कथा और उद्देश्य
चैत्र पूर्णिमा को अंजना के पुत्र का जन्म हुआ — पिता पवन का वेग लेकर। हनुमान इस परंपरा का प्रमाण हैं कि सबसे बड़ा बल वही है जो झुकना जानता है — भक्ति से विनम्र हुआ पराक्रम।
उनकी कथा भक्ति का प्रियतम तर्क है: सागर लाँघ सकने वाली शक्तियाँ शाप से विस्मृत पड़ी थीं, जब तक किसी ने स्मरण नहीं कराया कि वे कौन हैं — और स्मरण होते ही एक वाक्य में समुद्र पार। तुलसीदास की चालीस चौपाइयाँ — चालीसा — आज भी भारत का सर्वाधिक पठित काव्य इसी सेवा के कारण है: वह पाठक को पद-दर-पद स्मरण कराती है कि भक्ति क्या संभव कर देती है।
क्या किया जाता है
प्रातः दर्शन
जन्म सूर्योदय पर — मंदिरों में पूजा भोर से आरंभ।
चालीसा-सुंदरकांड
हनुमान चालीसा — प्रायः 11 या 108 — और सुंदरकांड पाठ।
सिंदूर-बूंदी
मूर्ति को सिंदूरी चोला; बूंदी या बेसन लड्डू नैवेद्य।
श्रेष्ठ समय
सूर्योदय काल की पूजा ही इस दिन की परंपरा है।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
दक्षिण भारत में हनुमान जयंती अन्य तिथियों पर भी — कहीं मार्गशीर्ष में।
मंगल और शनि वर्ष-भर उनके साप्ताहिक दिवस हैं।
उनके जन्म की कथा — अंजना, केसरी और वायु का वरदान — जाम्बवान के मुख से वाल्मीकि रामायण के किष्किन्धाकाण्ड, सर्ग 66 में है।
इस पर्व के मंत्र
टिप्पणी: तिथि-परंपराएँ क्षेत्रानुसार भिन्न हैं; यह चैत्र पूर्णिमा की परंपरा है।