हनुमान
हनुमान मंत्र
ॐ श्री हनुमते नमः
सरल उच्चारण
Om shree ha-nu-ma-te na-mah
Oṁ Śrī Hanumate Namaḥ
इस मंत्र के विषय में
हनुमान जी को प्रणाम — संकल्प, अनुशासन और निर्भयता के लिए इसका जाप होता है।
अर्थ
ॐ, श्री हनुमान को प्रणाम। नाम 'हनु' से पढ़ा जाता है — वह ठुड्डी जिस पर वज्र गिरा: उस दिन की स्मृति, जब स्वर्ग को भी उनके बल का लोहा मानना पड़ा। पर मंत्र उस बल को नहीं, उसके प्रयोग को प्रणाम करता है: पूरा का पूरा, राम के चरणों में धरा हुआ। साधक वही रूपांतरण माँगता है — बल जो सेवा में पूर्ण हो, साहस जो झुकना जानता हो।
मंत्र कंठस्थ करें
पहली पंक्ति तब तक बोलें जब तक वह बिना पढ़े न आ जाए, फिर अगली पंक्ति जोड़कर दोनों बोलें, जब तक पूरा मंत्र अपने आप न आ जाए।
पूरा मंत्र
यह मंत्र एक ही पंक्ति का है। इसे पूरा सीखें, फिर अपनी पुनरावृत्ति सूची में जोड़ें ताकि यह जाँच के लिए वापस आए।
ॐ श्री हनुमते नमः
Oṁ Śrī Hanumate Namaḥ
0अभी नहीं बोला
ग्यारह बार का लक्ष्य रखें। जैसे ही पूरा मंत्र अपने आप आने लगे, पढ़ना छोड़ दें।
प्रगति केवल इसी डिवाइस पर रहती है।
कब जपें
मंगलवार और शनिवार — हनुमान जी के वार — और हर उस काम से पहले जिसे साहस चाहिए: साक्षात्कार, प्रतियोगिता, सामना, रात की यात्रा। प्रायः चालीसा-पाठ के साथ गिना जाता है।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- श्रीśrī
- श्री — आदर और मंगल का वाचक
- हनुमतेhanumate
- हनुमान जी के लिए
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: हनुमान भक्ति परंपरा का पारंपरिक नाम-मंत्र

