हनुमान
बुद्धिर्बलं
बुद्धिर्बलं यशो धैर्यं निर्भयत्वमरोगता । अजाड्यं वाक्पटुत्वं च हनुमत्स्मरणाद्भवेत् ॥
Buddhir balaṁ yaśo dhairyaṁ nirbhayatvam arogatā, ajāḍyaṁ vāk-paṭutvaṁ ca hanumat-smaraṇād bhavet
सरल उच्चारण: Bud-dhir ba-lam ya-sho dhair-yam nir-bha-yat-vam a-ro-ga-taa, a-jaad-yam vaak pa-tut-vam cha ha-nu-mat sma-ra-naad bha-vet
इस मंत्र के विषय में
एक ही संस्कृत श्लोक, जो हनुमान-स्मरण के आठ वरदान गिनाता है — बुद्धि से वाक्पटुता तक; इतना छोटा कि एक दिन में कंठस्थ हो जाए और एक साँस में कहा जाए।
अर्थ
बुद्धि, बल, यश, धैर्य, निर्भयता, नीरोगता, जड़ता का अभाव और वाणी की कुशलता — ये सब हनुमान जी के स्मरण से प्राप्त होते हैं। यह सूची एक पाठ्यक्रम है: पहले वरदान व्यक्ति को गढ़ते हैं, शेष उसे सँभालते हैं — और शुल्क बस 'स्मरणात्' है: केवल स्मरण। इसीलिए यही वह श्लोक है, जो माता-पिता परीक्षा और यात्रा से पहले बच्चों में बो देते हैं।
कब जपें
परीक्षा-ऋतु का श्लोक — विद्यार्थी प्रतिदिन प्रातः, और परिणाम, प्रतियोगिता व साक्षात्कार से पहले पढ़ते हैं।
शब्द-दर-शब्द
- बुद्धिःbuddhiḥ
- बुद्धि
- बलंbalaṁ
- बल
- यशःyaśaḥ
- यश
- धैर्यंdhairyaṁ
- धैर्य
- निर्भयत्वम्nirbhayatvam
- निर्भयता
- अरोगताarogatā
- नीरोगता
- अजाड्यंajāḍyaṁ
- जड़ता का अभाव
- वाक्पटुत्वंvāk-paṭutvaṁ
- वाक्पटुता
- हनुमत्स्मरणाद्भवेत्hanumat-smaraṇād bhavet
- हनुमत्-स्मरण से प्राप्त होते हैं
स्रोत: पारंपरिक हनुमत्-स्मरण श्लोक; मूल ग्रंथ अनिश्चित (राम रक्षा स्तोत्र का अंग नहीं)

