
धन्वंतरि · लक्ष्मी · कुबेर
धनतेरस
दीपावली का प्रथम दीप — धन से पहले आरोग्य का पूजन।
तिथि: कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (उत्तर) · आश्विन कृष्ण त्रयोदशी (पश्चिम-दक्षिण) — रात वही है
आप कौन-सा पंचांग मानते हैं?
शुक्ल पक्ष का नाम हर जगह एक ही है। कृष्ण पक्ष उत्तर में एक मास का होता है और महाराष्ट्र, गुजरात व दक्षिण में उससे पिछले मास का — रात वही, नाम दो, और दोनों सही। चुनाव केवल इसी उपकरण पर रहता है।
सबसे सरल शब्दों में
दिवाली का पहला दिन: कुछ नया खरीदते हैं (एक चम्मच भी चलेगा!), यम के लिए पहला दीया जलाते हैं, और घर में आरोग्य-समृद्धि का स्वागत करते हैं।
कथा और उद्देश्य
इसी त्रयोदशी को समुद्र-मंथन से धन्वंतरि अमृत-कलश लेकर प्रकट हुए — अतः 'धन' का दिन सबसे पहले देव-वैद्य का है: आरोग्य ही प्रथम धन। घर नए पात्र या धातु का शकुन लेते हैं और दीपावली का पहला दीप जलता है।
इस दिन के दूसरे रक्षक यम हैं: द्वार पर रात-भर जलता यम-दीप मृत्यु के दूत को लौटा देने वाला माना जाता है — उस नववधू की स्मृति में, जिसने गहनों की जगमग के बीच पति को जगाए रखा और काल की घड़ी टल गई। धनतेरस का धन जीवन का पात्र बनकर खरीदा जाता है, वैभव की ट्रॉफ़ी बनकर नहीं।
क्या किया जाता है
धन्वंतरि स्मरण
धन से पूर्व आरोग्य की प्रार्थना।
नया पात्र-धातु
बर्तन, चाँदी या स्वर्ण — दिन का शकुन।
यम दीपम्
संध्या को द्वार पर यमराज हेतु दीप — परिवार की रक्षा के लिए।
श्रेष्ठ समय
क्रय दिन में; यम-दीप और पूजन प्रदोष काल में।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
2016 से 2024 तक भारत ने राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस धनतेरस — धन्वंतरि के दिन — को मनाया; 2025 से यह 23 सितंबर को निश्चित है।
कुछ घरों में तेरह दीप — त्रयोदशी के प्रतीक।
यम-दीप वर्ष का एकमात्र दीया है जिसे जान-बूझकर दक्षिण की ओर रखा जाता है — मृत्यु की दिशा, जो रक्षा का द्वार बन जाती है।