विष्णु
धन्वन्तरि नाम-मंत्र
ॐ धन्वन्तरये नमः
सरल उच्चारण
Om dhan-van-ta-ra-ye na-mah
Oṁ Dhanvantaraye Namaḥ
इस मंत्र के विषय में
धन्वन्तरि को प्रणाम — दिव्य वैद्य रूप में विष्णु के अवतार, आयुर्वेद के देवता माने जाते हैं। आरोग्य के लिए इनका स्मरण होता है।
अर्थ
ॐ, देव-वैद्य धन्वन्तरि को प्रणाम। वे मथे हुए सागर से अमृत-कलश लिए प्रकट हुए (श्रीमद्भागवत ८.८) — चित्र कहता है: गहराइयों का मंथन पूरा होने पर अंततः जो ऊपर आता है, वही आरोग्य है। मंत्र माँगता है कि उपचार में रसायन से अधिक कुछ हो — दिव्य हाथ, मानवीय हाथ को थामे रहे।
मंत्र कंठस्थ करें
पहली पंक्ति तब तक बोलें जब तक वह बिना पढ़े न आ जाए, फिर अगली पंक्ति जोड़कर दोनों बोलें, जब तक पूरा मंत्र अपने आप न आ जाए।
पूरा मंत्र
यह मंत्र एक ही पंक्ति का है। इसे पूरा सीखें, फिर अपनी पुनरावृत्ति सूची में जोड़ें ताकि यह जाँच के लिए वापस आए।
ॐ धन्वन्तरये नमः
Oṁ Dhanvantaraye Namaḥ
0अभी नहीं बोला
ग्यारह बार का लक्ष्य रखें। जैसे ही पूरा मंत्र अपने आप आने लगे, पढ़ना छोड़ दें।
प्रगति केवल इसी डिवाइस पर रहती है।
कब जपें
धनतेरस (धन्वन्तरि जयंती) पर, उपचार और शल्य-क्रियाओं से पहले, चिकित्सकों द्वारा अपने कार्य से पूर्व, और स्वास्थ्य-लाभ की दैनिक प्रार्थनाओं में स्मरण किया जाता है।
शब्द-दर-शब्द
- ॐoṁ
- प्रणव, आदि नाद
- धन्वन्तरयेdhanvantaraye
- दिव्य वैद्य धन्वन्तरि के लिए
- नमःnamaḥ
- प्रणाम, नमन
स्रोत: पारंपरिक नाम-मंत्र (आयुर्वेद परंपरा)

