
धन्वंतरि, लक्ष्मी, कुबेर, यम · प्रदोष में 30 मिनट
धनतेरस — धन्वंतरि, लक्ष्मी और यम-दीप
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (6 नवंबर 2026; 27 अक्तूबर 2027)
सबसे सरल शब्दों में
दिवाली की पहली संध्या: धन्वंतरि और लक्ष्मी का स्वागत, एक नई वस्तु, और यम के लिए दक्षिण-मुख साल का पहला दीया।
दीपावली का प्रथम दिवस एक ही संध्या में तीन प्रार्थनाएँ रखता है: अमृत-कलश सहित समुद्र से प्रकटे धन्वंतरि को — धन से पहले आरोग्य; लक्ष्मी-कुबेर से वर्ष की धर्मपूर्वक समृद्धि; और देहरी पर यम हेतु चौमुखा दीप — अकाल मृत्यु इस घर से होकर न जाए।
सामग्री
0/5 एकत्रविधि, चरण-दर-चरण
0/5 पूर्णधन्वंतरि-स्मरण
प्रदोष में प्रथम दीप देव-वैद्य के लिए और खीर अर्पण; धन से पहले घर के आरोग्य की प्रार्थना।
ॐ धन्वन्तरये नमः
Oṁ Dhanvantaraye Namaḥ
ॐ, देव-वैद्य धन्वन्तरि को प्रणाम। वे मथे हुए सागर से अमृत-कलश लिए प्रकट हुए (श्रीमद्भागवत ८.८) — चित्र कहता है: गहराइयों का मंथन पूरा होने पर अंततः जो ऊपर आता है, वही आरोग्य है। मंत्र माँगता है कि उपचार में रसायन से अधिक कुछ हो — दिव्य हाथ, मानवीय हाथ को थामे रहे।
स्रोत: पारंपरिक नाम-मंत्र (आयुर्वेद परंपरा)
नव-क्रय पूजन
दिन का क्रय — बर्तन, धातु, धनिया — रोली-अक्षत से अंकित कर लक्ष्मी-सम्मुख।
लक्ष्मी-कुबेर पूजन
दीपावली-पूजन का लघु रूप: दीप, पुष्प, नैवेद्य और श्रीं जाप — पूर्ण रूप अमावस्या की रात।
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः
Oṁ Śrīṁ Mahālakṣmyai Namaḥ
ॐ — श्रीं — महालक्ष्मी को प्रणाम। 'श्रीं' बीज रूप में सिमटी हुई 'श्री' है, जो जाप से बोई जाती है। मंत्र धन की देवी से उपहार नहीं, उपस्थिति माँगता है — परंपरा कहती है, जहाँ लक्ष्मी का वास है, वहाँ पर्याप्तता स्वयं चली आती है।
स्रोत: देवी-उपासना परंपरा का पारंपरिक बीज-मंत्र
तिजोरी पर कुबेर
तिजोरी/गल्ला स्वच्छ कर अंकित; कोषाध्यक्ष का मंत्र उस पर।
ॐ कुबेराय नमः
Oṁ Kuberāya Namaḥ
ॐ, देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर को प्रणाम। स्वामी नहीं — कोषाध्यक्ष: इस दर्शन में धन धरोहर है, उत्तर द्वार पर रक्षित, वहीं खुलता जहाँ सार्थक हो। यह मंत्र धन से कोषाध्यक्ष जैसा ही सम्बन्ध माँगता है — सँभाल, बिना जकड़ के।
स्रोत: पारंपरिक नाम-मंत्र
द्वार पर यम-दीप
सूर्यास्त के बाद चौमुखा तिल-तेल दीप मुख्य द्वार के बाहर दक्षिणाभिमुख — वर्ष की वह एक रात जब यम से दीप द्वारा प्रार्थना होती है। यह रात-भर जलता है।
टिप्पणी: धनतेरस राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस भी है — धन्वंतरि का वैद्यक क्रय-सूची से ऊपर है। यम-दीप का स्थान (बाहर, दक्षिणाभिमुख) ही इसका एक दृढ़ नियम है; हवा से सुरक्षित रखें।