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Dharamkira
त्योहार पंचांग
तेजोमय प्रभामंडल में मुकुटधारी सूर्यदेव, सात अश्वों के रथ पर आकाश में — रवि वर्मा प्रेस का प्रारंभिक लिथोग्राफ।
सूर्य नारायणरवि वर्मा प्रेस, early 1900s

सूर्य · छठी मइया

छठ पूजा

डूबते और उगते सूर्य को नदी-तट से अर्घ्य — तप ही भक्ति।

संध्या अर्घ्य: रविवार, 15 नवंबर 2026उषा अर्घ्य: सोमवार, 16 नवंबर 2026संध्या अर्घ्य 2027: गुरुवार, 4 नवंबर 2027उषा अर्घ्य 2027: शुक्रवार, 5 नवंबर 2027

तिथि: कार्तिक शुक्ल षष्ठी

सबसे सरल शब्दों में

सबसे कोमल और सबसे कठोर सूर्य-पर्व: डूबते और उगते सूरज को नदी में खड़े होकर अर्घ्य — उस सूर्य को धन्यवाद जो हमें सचमुच दिखता है।

कथा और उद्देश्य

छठ वह माँगता है जो विरले व्रत माँगते हैं — छत्तीस घंटे निर्जल, कमर-भर जल में खड़े होकर पहले अस्ताचल और फिर उदयगामी सूर्य को अर्घ्य: वह कृतज्ञता जो सूर्य को उसकी दोनों विनम्र वेलाओं में प्रणाम करती है, केवल मध्याह्न में नहीं।

इसके केंद्र में हैं छठी मइया — छठे दिन की वह माता जो हर नवजात की रक्षक है — और उनके चारों ओर वह गीत-परंपरा जिसे प्रचंड होने के लिए लाउडस्पीकर नहीं चाहिए: 'केलवा के पात पर' और 'पहिले पहिल छठी मइया' — दशकों से शारदा सिन्हा के स्वर में। बिहार के घाटों से यह पर्व अपने लोगों के संग चला है — वही अर्घ्य अब टेम्स, हडसन और दुबई की खाड़ी से भी उठता है।

क्या किया जाता है

नहाय-खाय, खरना

शुद्धि के दो दिन और खरना से व्रत आरंभ।

संध्या अर्घ्य

जल में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को ठेकुआ-फल का अर्घ्य।

उषा अर्घ्य-पारण

उषा अर्घ्य के साथ व्रत का पारण।

श्रेष्ठ समय

षष्ठी का सूर्यास्त और सप्तमी का सूर्योदय — दो अर्घ्य-क्षण।

सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।

जानने योग्य

  • छठ में न मूर्ति है न पुरोहित की अनिवार्यता — नदी, सूर्य और परिवार पर्याप्त हैं।

  • इन संध्याओं के बिहार के घाट भारत के विशालतम जन-समागमों में हैं।

  • छठ वर्ष में दो बार होता है: छोटा चैती छठ चैत्र शुक्ल षष्ठी को — वासंतिक नवरात्रि के छठे दिन — पड़ता है।

इस पर्व के मंत्र

टिप्पणी: कुछ सूचियाँ 18 नवंबर लिखती हैं; दीपावली (8 नव.) से षष्ठी-गणना 15–16 नवंबर की पुष्टि करती है।