
सरस्वती, लक्ष्मी, दुर्गा — अपने उपकरणों के माध्यम से
आयुध पूजा
दक्षिण की नवमी — पुस्तक, औज़ार, वाहन देवी के दृश्य हस्त रूप में पूजित।
तिथि: महानवमी — शारदीय नवरात्रि की नवमी तिथि; उपकरण विजयादशमी को फिर काम पर लौटते हैं।
सबसे सरल शब्दों में
जिस दिन औज़ार मंदिर बन जाते हैं — किताबें, वाद्य, मशीनें, स्कूल-बैग तक — धुलकर, कुमकुम पाकर, अपनी सेवा का धन्यवाद पाते हैं।
कथा और उद्देश्य
दक्षिण में नवरात्रि के अंतिम तीन दिन सरस्वती के हैं — और महानवमी को जीविका का हर साधन उनके सम्मुख रखा जाता है: बही और लैपटॉप, खराद और करछुल, वीणा, स्कूटर, ट्रैक्टर, शल्य-उपकरण। फिर औज़ार अगले दिन, विजयादशमी तक विश्राम करते हैं — जिस दिन की कथा है कि अज्ञातवास पूर्ण कर अर्जुन ने शमी-वृक्ष से अपने शस्त्र वापस लिए थे।
विजयादशमी की प्रातः केरल आदि में विद्यारंभम् है: सहस्रों बालक बड़ों की उँगली थामे चावल या रेत में जीवन के प्रथम अक्षर लिखते हैं। काम को विश्राम, फिर काम का आरंभ — देवी के नाम के साथ।
क्या किया जाता है
उपकरण-स्थापन
पूर्व संध्या को उपकरण स्वच्छ कर विभूति-कुमकुम सहित देवी-सम्मुख स्थापित।
पूजा और नैवेद्य
मुरमुरे (पोरी), गुड़, पायसम्; वाहनों के आगे परंपरा से कुम्हड़ा फोड़ा जाता है।
विद्यारंभम्
विजयादशमी की प्रातः बालकों के प्रथम अक्षर — 'हरि श्री गणपतये नमः' — चावल में।
श्रेष्ठ समय
पूजा नवमी प्रातः; उपकरण विजयादशमी के शुभ मुहूर्त तक विश्राम में।
सटीक मुहूर्त नगर और परंपरा अनुसार भिन्न होता है — निश्चित समय हेतु अपने स्थान का पंचांग देखें।
जानने योग्य
मैसूरु दशहरा अगले दिन, विजयादशमी को, चामुंडेश्वरी की स्वर्ण-अंबारी गजयात्रा से पूर्ण होता है।
दक्षिण के टेक-कार्यालय अपने सर्वरों को माला पहनाते हैं — परंपरा बिना पलक झपके ढल जाती है।
केरल में पुस्तकें दुर्गाष्टमी की 'पूजा-वेप्पु' से विजयादशमी की 'पूजा-एडुप्पु' तक देवी के पास विश्राम करती हैं।
इस पर्व के मंत्र
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः
सरस्वती मंत्र
जाप आरंभ करें →या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता । या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना । या ब्रह्माच्युतशङ्करप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता । सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ॥
या कुन्देन्दु — सरस्वती वन्दना
जाप आरंभ करें →ॐ गं गणपतये नमः
गणेश मंत्र
जाप आरंभ करें →